जालौन में ऐतिहासिक चौरासी गुम्बद के सामने वन क्षेत्र में भीषण आग: धू-धू कर जला जंगल, सूचना के बाद भी नहीं पहुंची दमकल गाड़ियां

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
अचानक भड़की आग, देखते ही देखते धारण किया विकराल रूप
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से इस वक्त एक बेहद चिंताजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है। जालौन के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध कालपी कोतवाली क्षेत्र में स्थित ‘चौरासी गुम्बद’ के ठीक सामने मौजूद वन क्षेत्र (फॉरेस्ट एरिया) में अचानक भीषण आग लग गई। सूखे पत्तों और तेज हवाओं के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में बेहद विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्होंने वन क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आसमान में दूर-दूर तक काले धुएं का गुबार देखा जा सकता है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
राहगीरों ने दिखाई सूझबूझ, प्रशासन को दी सूचना
जिस वक्त यह हादसा हुआ, राष्ट्रीय राजमार्ग और आस-पास के मार्गों से गुजर रहे राहगीरों ने वन क्षेत्र से उठती हुई आग की गगनचुंबी लपटों को देखा। वन्यजीवों और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भांपते हुए स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने तुरंत सक्रियता दिखाई। उन्होंने बिना समय गंवाए दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) और स्थानीय पुलिस प्रशासन को इस भयावह घटना की लिखित और मौखिक सूचना दी।
दमकल विभाग की बड़ी लापरवाही: घंटों बाद भी मौके पर नहीं पहुंची गाड़ियां
इस पूरी घटना में स्थानीय प्रशासन और विशेषकर दमकल विभाग की एक बेहद गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने की पुख्ता और त्वरित सूचना दिए जाने के घंटों बाद भी फायर ब्रिगेड की एक भी गाड़ी मौके पर नहीं पहुंची। दमकल विभाग की इस सुस्ती और संवेदनहीनता के कारण वन क्षेत्र में आग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आग की भीषणता को देखते हुए आस-पास के रिहायशी इलाकों और ऐतिहासिक धरोहर चौरासी गुम्बद की सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और डर का माहौल व्याप्त हो गया है।
वन्यजीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान की आशंका
कालपी का यह वन क्षेत्र विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े वन्यजीवों, पक्षियों और प्राकृतिक वनस्पतियों का घर है। गर्मी के इस मौसम में अचानक लगी इस भीषण आग और दमकल विभाग की देरी के कारण दर्जनों पेड़ जलकर राख हो चुके हैं। पर्यावरणविदों और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग ने चिंता जताई है कि यदि आग पर जल्द से जल्द काबू नहीं पाया गया, तो कई मूक वन्यजीव इस आग की भेंट चढ़ सकते हैं और क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
ऐतिहासिक इमारत चौरासी गुम्बद के ठीक सामने इस तरह की घटना होना और प्रशासन का समय पर न जागना, जिले की आपातकालीन सेवाओं की पोल खोलता है। स्थानीय जनता अब यह सवाल उठा रही है कि अगर यह आग वन क्षेत्र से फैलकर ऐतिहासिक धरोहर या पास की बस्तियों तक पहुंच जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? फिलहाल, स्थानीय स्तर पर लोग अपने स्तर से आग पर नजर बनाए हुए हैं और उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर फायर टेंडर की गाड़ियां भेजने की गुहार लगा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के संज्ञान में भी यह बात डाली जा रही है।






