जालौन में सरकारी भूमि पर कब्जे का खेल: प्रधान और लेखपाल पर दलित परिवार से मारपीट और जातिसूचक गाली-गलौज का आरोप

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जालौन के जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर अपनी व्यथा सुनाते हुए पीड़ित दलित परिवार और शिकायती पत्र की प्रति।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक मिलीभगत का एक शर्मनाक मामला प्रकाश में आया है। उरई कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बजीदा में एक दलित परिवार को कथित रूप से दबंगों, ग्राम प्रधान और हल्का लेखपाल की मिलीभगत का शिकार होना पड़ा है। पीड़ित ने जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर न्याय की गुहार लगाई है, जिससे स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

​दबंगों और सरकारी तंत्र की सांठगांठ

​पीड़ित तेजराम ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को दिए गए शिकायती पत्र में सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गांव में सरकारी भूमि पर कब्जा करने का एक सुनियोजित खेल चल रहा है, जिसमें ग्राम प्रधान और हल्का लेखपाल की सक्रिय भागीदारी है। आरोप है कि यह गिरोह पहले सरकारी जमीनों को चिन्हित करता है, फिर उस पर अवैध कब्जा करवाकर निर्माण कार्य को अंजाम देता है और बाद में उसे ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। तेजराम के अनुसार, यदि कोई इस अवैध कार्य का विरोध करता है, तो उसे सरकारी तंत्र के दम पर कुचलने की कोशिश की जाती है।

​घर की चारदीवारी तोड़ी, मवेशी हुए फरार

​पीड़ित तेजराम ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि दबंगों ने न केवल सरकारी जमीन पर कब्जा किया, बल्कि उनके निजी स्वामित्व वाली जमीन पर बनी चारदीवारी को भी जेसीबी या अन्य साधनों से ढहा दिया। इस अप्रत्याशित हमले से घर में बंधे मवेशी डरकर इधर-उधर भाग गए, जिससे पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक क्षति हुई है। जब पीड़ित ने इस तोड़फोड़ का विरोध किया, तो आरोपितों ने उनके साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उन्हें जातिसूचक गालियां देकर अपमानित भी किया।

​”गांव छोड़ने की धमकी से परिवार दहशत में”

​पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपितों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने पूरे परिवार को गांव से निकालने की धमकी दी है। तेजराम ने रोते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिजनों को जान का खतरा बना हुआ है। दबंगों ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि यदि दोबारा शिकायत की गई, तो उनके पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इस घटना के बाद से दलित परिवार में डर का माहौल है और वे अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

​प्रशासन से न्याय की गुहार

​घटना के बाद पीड़ित तेजराम और भूपसिंह ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो। पीड़ित ने दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में कठोर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कराने और परिवार को प्रशासन की ओर से सुरक्षा मुहैया कराने की भी अपील की गई है।

​प्रशासन की प्रतिक्रिया

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय ने मामले को संज्ञान में लिया है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि संबंधित क्षेत्र के लेखपाल और ग्राम प्रधान की भूमिका की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, यह मामला जालौन के ग्रामीण अंचलों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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