जालौन में रेप पीड़िता के साथ बर्बरता: घर में घुसकर मारपीट और अभद्रता का आरोप, आटा थाना प्रभारी को हटाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर भारी प्रदर्शन

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जालौन कलेक्ट्रेट परिसर में हाथों में न्याय की मांग वाली तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करतीं ग्रामीण महिलाएं और स्थानीय नागरिक

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय स्थित आटा थाना क्षेत्र में एक वर्ष 2024 की रेप पीड़िता के साथ दबंगों द्वारा घर में घुसकर मारपीट करने, कपड़े खींचकर अभद्रता करने और जातिसूचक गालियां देकर अपमानित करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर आटा थानाध्यक्ष को तत्काल निलंबित करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।

​आधी रात को हथियारों के साथ घेराबंदी और दहशत का माहौल

​पीड़िता द्वारा जिलाधिकारी (DM) राजेश कुमार पांडेय और पुलिस अधीक्षक (SP) विनय कुमार सिंह को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, घटनाक्रम की शुरुआत 15 मई 2026 की रात करीब 9 बजे हुई। पीड़िता का आरोप है कि एक गाड़ी में सवार होकर आधा दर्जन से अधिक दबंग उसके घर के पास पहुंचे। इनमें से कुछ लोगों के हाथों में अवैध असलहे (हथियार) भी थे। आरोपी रात के अंधेरे में पीड़िता के घर पर टॉर्च की रोशनी डालकर रेकी कर रहे थे और परिवार को डरा रहे थे। घटना से भयभीत होकर पीड़ित परिवार ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय आटा थाना पुलिस को दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस शुरुआती चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।

​मंदिर से लौटते समय रास्ते में रोककर बर्बरता

​शिकायती पत्र में उल्लेख किया गया है कि अगली सुबह यानी 16 मई को करीब 10 बजे जब पीड़िता घर से बाहर निकली, तो गांव के ही एक रसूखदार ‘मटरू’ ने उसे रास्ते में रोककर मां-बहन की अभद्र गालियां देना शुरू कर दिया। जान के डर से पीड़िता किसी तरह भागकर वापस अपने घर लौट आई। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे जब वह गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना कर वापस लौट रही थी, तभी पूर्व नियोजित साजिश के तहत मोनिस खान, साहिल खान, सहीन और गुल्लू खान ने उसे बीच रास्ते में घेर लिया।

​आरोप है कि इन सभी लोगों ने मिलकर पीड़िता पर हमला कर दिया। दबंगों ने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए पीड़िता के बाल पकड़े और उसे घसीटते हुए आरसीसी (पक्की) सड़क पर पटक दिया। इस दौरान उसके कपड़े खींचकर घोर अभद्रता की गई और उसे लहूलुहान कर दिया गया। चीख-पुकार सुनकर जब पीड़िता के वृद्ध माता-पिता उसे बचाने दौड़े, तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की और पीड़िता के छोटे भाई-बहनों को जान से मारने की धमकी देते हुए गाली-गलौज की। इस पूरी वारदात के दौरान आरोपियों ने पीड़िता के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उसे सामाजिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित भी किया।

​पुराना रंजिश और जेल से छूटे आरोपी की धमकियां

​इस पूरे मामले के तार वर्ष 2024 में हुई एक अन्य संगीन वारदात से जुड़े हैं। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024 में पीड़िता के साथ दुष्कर्म (रेप) की घटना हुई थी, जिसमें आटा थाने में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उस मामले का मुख्य आरोपी समीर खान करीब 9 महीने जेल में काटने के बाद हाल ही में जमानत पर बाहर आया है। पीड़िता का आरोप है कि जेल से बाहर आते ही समीर खान और उसके साथी लगातार केस वापस लेने और समझौता करने का दबाव बना रहे थे। 15 मई की रात को घर पर टॉर्च लगाने और दहशत फैलाने की मुख्य साजिश भी समीर खान ने ही रची थी, जिसके बाद अगले दिन उसके परिजनों और साथियों ने इस हिंसक वारदात को अंजाम दिया।

​कलेक्ट्रेट पर फूटा महिलाओं का आक्रोश, थानाध्यक्ष को सस्पेंड करने की मांग

​इस बर्बर घटना और आटा पुलिस की शिथिल कार्यप्रणाली के खिलाफ सोमवार को बुंदेलखंड की महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में “पीड़िता को न्याय दो” और “दोषियों को गिरफ्तार करो” लिखी तख्तियां लेकर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं और स्थानीय लोग कलेक्ट्रेट मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आटा थाना प्रभारी (SO) अजय कुमार सिंह अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं और घटना की सूचना देने के बाद भी उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

​आक्रोशित भीड़ ने कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग उठाई कि आटा थानाध्यक्ष को तुरंत सस्पेंड किया जाए। प्रदर्शन की अगुवाई कर रही महिलाओं का कहना था कि जब तक सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव का माहौल बना हुआ है, जिसे देखते हुए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

​प्रशासन का रुख: निष्पक्ष जांच का आश्वासन

​इस हाई-प्रोफाइल मामले पर जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार, पीड़िता और उसके भाई के बयानों (बाइट) को रिकॉर्ड दर्ज कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आटा पुलिस की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया है कि कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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