जालौन में खाकी और दबंगों के गठजोड़ का सनसनीखेज आरोप: दलित महिला का सामाजिक बहिष्कार, एसपी से लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय को तार-तार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। कालपी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम निवाड़ी की एक दलित महिला ने गांव के रसूखदार दबंगों और स्थानीय पुलिस चौकी इंचार्ज पर उत्पीड़न व प्रताड़ना के संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनय कुमार सिंह के समक्ष पेश होकर एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उसने न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। महिला का आरोप है कि दबंगों ने न सिर्फ उसके घर में घुसकर मारपीट की, बल्कि पुलिस ने भी आरोपियों का साथ देते हुए उस पर समझौते का अनैतिक दबाव बनाया।
घर में घुसकर लाठी-डंडों से हमला, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग
एसपी को सौंपे गए शिकायती पत्र में निवाड़ी गांव की निवासी रूबी पत्नी उमाशंकर ने घटना का विस्तृत ब्यौरा दिया है। पीड़िता के अनुसार, यह विवाद 14 मई 2026 की सुबह लगभग 11 बजे शुरू हुआ, जब वह अपने घर के आंगन में गेहूं धो रही थी। इसी दौरान गांव के कुछ दबंग और रसूखदार लोग लाठी-डंडों और पत्थरों से लैस होकर जबरन उसके घर में घुस आए। आरोपियों ने आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और जब महिला ने इसका विरोध किया, तो उन्होंने बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस हमले में महिला और उसके पुत्र अमित को गंभीर चोटें आईं। घटना के वक्त घर में पीड़िता के नाबालिग बच्चे भी मौजूद थे, जो इस भयावह मंजर को देखकर सहम गए।
यूपी 112 ने बचाया, लेकिन चौकी में हुआ ‘अन्याय’
पीड़िता रूबी ने बताया कि हमले के दौरान उसने किसी तरह मोबाइल से डायल 112 पुलिस को सूचना दी। पीआरवी (PRV) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव किया, जिससे उनकी जान बच सकी। पुलिस कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर ज्ञान भारती चौकी ले गई और पीड़िता व उसके पुत्र को भी अगले दिन चौकी आने को कहा।
पीड़िता का आरोप है कि असली प्रताड़ना अगले दिन चौकी परिसर के भीतर शुरू हुई। जब वह न्याय की उम्मीद लेकर ज्ञान भारती चौकी पहुंची, तो वहां न्याय की जगह उसे अपमान मिला। शिकायत के मुताबिक, चौकी इंचार्ज विपिन यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने पीड़िता के साथ अभद्र व्यवहार किया। महिला का आरोप है कि चौकी इंचार्ज ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और आरोपियों के रसूख के आगे झुकते हुए जबरन समझौते के कागजात पर दस्तखत करा लिए। विरोध करने पर पीड़िता के बेटे का मोबाइल फोन भी पुलिस द्वारा छीन लिया गया।
यादव बाहुल्य गांव में दलित परिवार का सामाजिक बहिष्कार
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पीड़िता ने गांव में अपने परिवार के सामाजिक बहिष्कार (Social Boycott) का दावा किया। रूबी का कहना है कि निवाड़ी गांव यादव बाहुल्य है, जिसके कारण आरोपी पक्ष बेहद मजबूत स्थिति में है। दबंगों ने पूरे गांव में यह मुनादी (ऐलान) करवा दी है कि कोई भी दुकानदार इस दलित परिवार को राशन या दैनिक उपयोग का सामान नहीं देगा। इतना ही नहीं, गांव के रिक्शा और ऑटो चालकों को भी हिदायत दी गई है कि वे इस परिवार को कोई परिवहन सेवा न दें। इस अघोषित सामाजिक बहिष्कार और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर अब यह गरीब परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो गया है।
सुरक्षा की चिंता और सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़िता ने एसपी विनय कुमार सिंह को दिए पत्र में आशंका जताई है कि स्थानीय पुलिस और दबंगों की मिलीभगत के कारण उसके परिवार की जान को गंभीर खतरा है। आरोपी कभी भी किसी बड़ी अनहोनी को अंजाम दे सकते हैं। महिला ने पुलिस कप्तान से ज्ञान भारती चौकी इंचार्ज विपिन यादव और हमलावर दबंगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा अपने परिवार को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने की भावुक अपील की है।
पीड़िता का बयान (बाइट – रूबी): “हम अपने ही घर में सुरक्षित नहीं हैं। पहले गांव के दबंगों ने हमें मारा और जब हम पुलिस के पास गए, तो चौकी इंचार्ज ने हमें ही जातिसूचक गालियां दीं और जबरन समझौते पर दस्तखत करवा लिए। अब पूरे गांव में हमारा हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है। हमें सामान तक नहीं मिल रहा है। हम न्याय की भीख मांगने एसपी साहब के पास आए हैं।”
इस मामले के सामने आने के बाद जिला पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह है कि जालौन पुलिस के आला अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाते हैं और पीड़ित दलित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।






