गौरैया दिवस पर एसडीएम ज्योति सिंह की अनूठी पहल: अधिवक्ताओं को बांटे पक्षियों के घरौंदे, संरक्षण की अपील

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कोंच तहसील परिसर में एसडीएम ज्योति सिंह अधिवक्ताओं को लकड़ी के कृत्रिम घोंसले (घरौंदे) वितरित करते हुए और गौरैया संरक्षण की शपथ लेते हुए

UPSAMVAD NEWS DESK

कोंच (जालौन): आधुनिकता की अंधी दौड़ और कंक्रीट के जंगलों के बीच लुप्त हो रही नन्ही गौरैया को बचाने के लिए शुक्रवार को तहसील परिसर कोंच में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘विश्व गौरैया दिवस’ के अवसर पर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ज्योति सिंह ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए अधिवक्ताओं को पक्षियों के कृत्रिम घोंसले (घरौंदे) वितरित किए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय हो रही गौरैया के संरक्षण के प्रति समाज के प्रबुद्ध वर्ग को जागरूक करना और इस अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देना है।

शहरीकरण और मोबाइल टावर बन रहे गौरैया के दुश्मन

​एसडीएम कार्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसडीएम ज्योति सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हर साल 20 मार्च को हम गौरैया दिवस मनाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि हमारे आंगन में चहकने वाली यह छोटी सी चिड़िया अब विरली ही दिखाई देती है।” उन्होंने बताया कि बढ़ते शहरीकरण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन के कारण गौरैया की संख्या में भारी गिरावट आई है। यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

अधिवक्ताओं से की ‘जन-आंदोलन’ बनाने की अपील

​एसडीएम ने कार्यक्रम में मौजूद अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अधिवक्ता समाज का एक प्रभावशाली अंग हैं। यदि वे इस मुहिम से जुड़ते हैं, तो संदेश दूर तक जाएगा। उन्होंने अपील की कि अधिवक्ता इन घोंसलों को न केवल अपने घरों और कार्यालयों के आसपास लगाएं, बल्कि गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु अन्य लोगों को भी प्रेरित करें। ज्योति सिंह ने जोर देते हुए कहा कि गौरैया का संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

इन अधिवक्ताओं को वितरित किए गए घरौंदे

​पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम के तहत सांकेतिक रूप से दस प्रमुख अधिवक्ताओं को सुरक्षित लकड़ी के घोंसले भेंट किए गए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट राम शरण कुशवाहा, दीनानाथ निरंजन, अवधेश द्विवेदी, और राघवेंद्र विदुआ उपस्थित रहे। साथ ही के.बी. निरंजन, हरि सिंह निरंजन और के.के. श्रीवास्तव सहित तहसील के कई अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस पहल की सराहना की और अपने-अपने क्षेत्रों में पक्षी संरक्षण का संकल्प लिया।

पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा है गौरैया

​विशेषज्ञों के अनुसार, गौरैया पर्यावरण की स्वच्छता और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का भक्षण कर किसानों की मित्र भी कहलाती है। एसडीएम ज्योति सिंह की इस पहल ने कोंच क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि यदि छोटे-छोटे प्रयासों से हम प्रकृति को सहेजने का काम शुरू करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और जीवंत वातावरण तैयार किया जा सकता है।

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