जालौन पहुंचे गोसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय, गौशालाओं का किया निरीक्षण

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उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय जालौन दौरे के दौरान गौशाला का निरीक्षण करते हुए और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए।

उरई, जालौन: उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय एक दिवसीय दौरे पर जालौन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिले के विभिन्न गौवंश आश्रय स्थलों (गौशालाओं) का औचक निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को गौशालाओं के सुचारू व व्यवस्थित संचालन के लिए कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए, ताकि ठंड और अन्य मौसम में मवेशियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

​गौशालाओं की व्यवस्थाओं का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए निर्देश

​दौरे के शुरुआती चरण में श्री उपाध्याय ने उरई समेत जनपद की कई प्रमुख गौशालाओं का रुख किया। वहां उन्होंने चारे-पानी की उपलब्धता, साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकों की मौजूदगी की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक व पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए पर्याप्त चारे और चिकित्सकीय सुविधाओं की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

​”गौमूत्र से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज संभव”

​निरीक्षण के उपरांत आयोजित एक स्थानीय प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए गोसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने आयुर्वेद और गो-उत्पाद के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि गौमूत्र में कई ऐसे औषधीय रसायन पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं और इसके नियमित सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भी संभव है।

​अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, “मैं स्वयं नियमित रूप से गौमूत्र का सेवन करता हूँ।” उन्होंने आगे बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति में गाय को सिर्फ एक पशु नहीं बल्कि माता का दर्जा दिया गया है, और जिस घर में गाय होती है, वहां का वातावरण सकारात्मक रहता है तथा परिवार के सदस्यों को कई प्रकार की शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है।

​खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है गोबर और गो-उत्पाद

​प्रेस वार्ता के दौरान कृषि और पर्यावरण पर चर्चा करते हुए श्री उपाध्याय ने कहा कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है। इसके विपरीत, गाय के गोबर से तैयार होने वाली जैविक खाद फसलों के लिए अत्यधिक उपयुक्त और पौष्टिक है। इसके उपयोग से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है और भूमि की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है।

​युवाओं में बढ़ रही है गो-संरक्षण की ललक, योजनाओं का मिल रहा लाभ

​गौ संरक्षण और संवर्द्धन के क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक बदलावों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग गोसेवा के प्रति तेजी से जागरूक हो रहा है। उत्तर प्रदेश के कई युवा आगे आकर आधुनिक और व्यवस्थित गौशालाओं का संचालन कर रहे हैं। इसके साथ ही, प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे ‘मिनी नंदिनी योजना’ का लाभ उठाकर युवा न केवल गोवंश की सेवा कर रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं।

​दौरे के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि शासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण का कार्य और अधिक सुदृढ़ होगा।

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