जालौन: प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत से हड़कंप; दो डॉक्टरों व नर्सों पर FIR, बांके बिहारी हॉस्पिटल सील

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कुठौंद (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। कुठौंद कस्बा स्थित ‘बांके बिहारी हॉस्पिटल’ नामक एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद मृतका के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने कुठौंद थाने का घेराव कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) ने त्वरित एक्शन लेते हुए अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है, वहीं पुलिस ने दो डॉक्टरों सहित चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सामान्य प्रसव का भरोसा देकर शुरू हुआ मौत का खेल
प्राप्त विवरण के अनुसार, कुठौंद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नोरेजपुर निवासी जितेंद्र कुमार ने स्थानीय पुलिस को एक लिखित तहरीर दी है। जितेंद्र ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी रश्मी को प्रसव पीड़ा होने पर 13 जून को कुठौंद कस्बे के बांके बिहारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में तैनात डॉ. बृजेश तिवारी, डॉ. कौशल और दो अज्ञात नर्सों ने रश्मी की प्रारंभिक जांच की। डॉक्टरों ने जितेंद्र और उसके परिवार को पूरी तरह आश्वस्त किया था कि स्थिति सामान्य है और डिलीवरी भी सामान्य (नॉर्मल) ही होगी।
पीड़ित पति का आरोप है कि प्रसव प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ ने घोर लापरवाही बरती, जिसके कारण सबसे पहले नवजात शिशु की गर्भ में या प्रसव के तुरंत बाद मौत हो गई। इसके बाद प्रसूता रश्मी की हालत भी तेजी से बिगड़ने लगी।
रेफर-रेफर का खेल और डॉक्टरों का फरार होना
परिजनों का कहना है कि जब रश्मी की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तो अस्पताल का स्टाफ और डॉक्टर घबरा गए। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए परिजनों को उसे तुरंत किसी अन्य बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। आनन-फानन में बदहवास परिजन रश्मी को पड़ोसी जिले औरैया स्थित ‘रक्षा हॉस्पिटल’ लेकर पहुंचे। वहां भी हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उसे चिचौली (सैफई) के लिए रेफर कर दिया।
अत्यंत गंभीर स्थिति में परिजन जब रश्मी को लेकर चिचौली पहुंचे, तो वहां के चिकित्सकों ने जांच के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पीड़ित जितेंद्र ने यह भी संगीन आरोप लगाया कि घटना के बाद बांके बिहारी हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ मामले से जुड़े आवश्यक चिकित्सीय दस्तावेज और केस शीट लेकर मौके से फरार हो गए। यही नहीं, इलाज के नाम पर उनसे करीब 15 हजार रुपये की रकम भी पहले ही वसूली जा चुकी थी।
थाने का घेराव और स्वास्थ्य विभाग का कड़ा एक्शन
जच्चा-बच्चा की मौत की खबर जैसे ही नोरेजपुर गांव और कुठौंद कस्बे में फैली, ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। भारी संख्या में आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने कुठौंद थाने का रुख किया और परिसर का घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप था कि यदि अस्पताल समय रहते रैफर कर देता या सही इलाज देता, तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी।
मामले की गूंज जिला मुख्यालय तक पहुंचने पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने तत्काल प्रभाव से एक जांच टीम को मौके पर भेजा। जांच में अस्पताल के भीतर प्रथम दृष्टया भारी अनियमितताएं, मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक कमियां पाई गईं। इसके बाद सीएमओ के निर्देश पर बांके बिहारी हॉस्पिटल को सील कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस पूरे प्रकरण की एक अलग से उच्च स्तरीय तकनीकी जांच भी कराई जा रही है।
पुलिसिया कार्रवाई और उठते गंभीर सवाल
कुठौंद थाना पुलिस ने पीड़ित पति जितेंद्र की तहरीर के आधार पर आरोपी डॉ. बृजेश तिवारी, डॉ. कौशल तथा दो अज्ञात नर्सों के खिलाफ संबंधित संगीन धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
क्षेत्राधिकारी (CO) शैलेंद्र कुमार बाजपेयी ने इस संबंध में आधिकारिक बयान देते हुए कहा:
“पीड़ित पक्ष की तहरीर के आधार पर नामजद डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की बेहद गहनता और निष्पक्षता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में जो भी वैज्ञानिक व विधिक तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”
इस घटना ने एक बार फिर जालौन के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुल गए निजी अस्पतालों और उनके संचालकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में कई ऐसे अस्पताल संचालित हैं जिनके पास न तो योग्य डॉक्टर हैं और न ही आपातकालीन सुविधाएं, जो सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।






