जालौन पुलिस का बड़ा प्रहार: फर्जी सिम और बैंक खातों के जरिए देशभर में ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, एक गिरफ्तार

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जालौन में साइबर पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी और बरामद मोबाइल फोन के साथ साक्ष्य, पुलिस कार्रवाई का दृश्य।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जालौन की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाकर देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की धर-पकड़ के लिए जाल बिछा दिया गया है।

प्रतिबिंब पोर्टल से मिली लीड

​इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत 8 जुलाई 2026 को हुई, जब साइबर थाना उरई को ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ के माध्यम से कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली। पुलिस ने इन नंबरों को सर्विलांस पर लिया, जिससे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उपनिरीक्षक शिवेंद्र सिंह परमार की तहरीर पर पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत सिरसाकलार थाना क्षेत्र के मानपुर निवासी दीपेन्द्र कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया।

जाल में फंसा ‘फेक पुलिस’ का गिरोह

​पूछताछ के दौरान आरोपी दीपेन्द्र ने ठगी की जो कार्यप्रणाली (Modus Operandi) बताई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। आरोपी और उसके साथी बिहार पुलिस की वेबसाइट से राज्य में दर्ज मुकदमों की प्रतियां डाउनलोड करते थे। इसके बाद, गिरोह के सदस्य पीड़ित (जिनके खिलाफ मामला दर्ज होता था) को फोन करते थे। फोन करने वाला व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को केस निस्तारण (Settlement) का झांसा देता था। लोगों का विश्वास जीतने के बाद, उनसे विभिन्न बैंक खातों में पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कराए जाते थे।

​जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह बेहद व्यवस्थित तरीके से काम करता था। इसमें हर सदस्य की भूमिका तय थी—कोई बैंक खाते खुलवाने का जिम्मा संभालता था, तो कोई फर्जी सिम कार्ड की व्यवस्था करता था, जबकि अन्य सदस्य फोन कॉल्स के जरिए ठगी को अंजाम देते थे।

एनसीआरपी पोर्टल पर मिले 24 मामले

​साइबर पुलिस की गहन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई स्थानीय मामला नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा है। पुलिस ने जब गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए 12 सिम कार्डों की एनसीआरपी (National Cybercrime Reporting Portal) पर जांच की, तो उन नंबरों पर 24 से अधिक ऑनलाइन शिकायतें दर्ज पाई गईं। ये शिकायतें न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि बिहार और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी संबंधित हैं।

पुलिस की आगे की कार्रवाई

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जालौन पुलिस अधीक्षक विनय सिंह के पर्यवेक्षण और अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में दो विशेष टीमों का गठन किया गया है। शनिवार को पुलिस ने घेराबंदी कर उरई के इकलाशपुरा चौराहा के पास से मुख्य आरोपी दीपेन्द्र कुमार को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से घटना में प्रयुक्त दो की-पैड मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद हुआ है।

बाइट:- डॉ. ईशान सोनी (ASP, जालौन)

अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी ने बताया कि, “पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह के छह अन्य सदस्यों की पहचान कर ली गई है। हम उनके आपराधिक इतिहास को खंगाल रहे हैं और पड़ोसी जिलों व राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर रहे हैं। साइबर अपराधों के खिलाफ हमारा अभियान निरंतर जारी है और ऐसे संगठित गिरोहों के हर सदस्य को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”

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