जालौन रोडवेज डिपो में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला: संविदा परिचालकों ने अधिकारी पर लगाए 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने और अवैध वसूली के गंभीर आरोप

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। उरई रोडवेज बस स्टैंड पर कार्यरत संविदा परिचालकों ने डिपो के एक जिम्मेदार अधिकारी पर गंभीर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। बिना किसी लिखित नोटिस के कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने और दोबारा नौकरी पर रखने के एवज में रिश्वत मांगे जाने से परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बिना नोटिस ड्यूटी से हटाने और 20 हजार की रिश्वत का आरोप
मामला उरई कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुख्य उरई रोडवेज बस स्टैंड का है। यहाँ कार्यरत संविदा परिचालकों ने डिपो अधिकारी उदय गोयल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। पीड़ित परिचालकों का आरोप है कि अधिकारी द्वारा उन्हें बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस या विभागीय प्रक्रिया के अचानक ड्यूटी से हटा दिया गया है।
जब इन कर्मचारियों ने अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए दोबारा नियुक्ति या ड्यूटी पर वापसी की गुहार लगाई, तो आरोप है कि डिपो अधिकारी उदय गोयल द्वारा प्रत्येक कर्मचारी से 20-20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी पाने के लिए इस तरह की अवैध डिमांड से उनका आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है।
करीब 27 कर्मचारियों की आजीविका पर संकट
यह विवाद केवल एक-दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लगभग 27 संविदा परिचालकों का भविष्य और उनकी आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। अचानक उठाए गए इस दंडात्मक कदम से इन सभी कर्मचारियों के परिवारों के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिचालकों का आरोप है कि अधिकारी द्वारा केवल डराने-धमकाने और अवैध वसूली के उद्देश्य से ही उन्हें ड्यूटी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
अवैध वसूली और मनमानी के अन्य गंभीर मामले
पीड़ित संविदा परिचालकों ने केवल रिश्वत मांगने का ही नहीं, बल्कि डिपो के भीतर कई अन्य मामलों में भी बड़े पैमाने पर अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बस संचालन और ड्यूटी आवंटन के नाम पर भी कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जाता है। मनमाने तरीके से नियम कायदों को ताक पर रखकर अधिकारी द्वारा अपनी तानाशाही चलाई जा रही है, जिससे पूरा परिवहन तंत्र भ्रष्टाचार की चपेट में नजर आ रहा है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित परिचालकों ने स्थानीय स्तर पर एआरएम (सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक) से मिलकर इस पूरे भ्रष्टाचार की लिखित व मौखिक शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, संविदा कर्मचारियों का आरोप है कि उच्च स्तर पर शिकायत किए जाने के बावजूद डिपो अधिकारी के खिलाफ कोई भी ठोस या कड़क प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। विभागीय सुस्ती और लीपापोती के रवैये के कारण आरोपी अधिकारी के हौसले और अधिक बुलंद बताए जा रहे हैं।
पीड़ित परिचालक प्रशांत पांडे का बयान
इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए पीड़ित रोडवेज परिचालक प्रशांत पांडे ने बाइट के माध्यम से अपना दर्द बयां किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डिपो अधिकारी द्वारा हम गरीब संविदा कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है। बिना किसी गलती और नोटिस के काम से हटाकर अब री-ज्वाइनिंग के नाम पर पैसों की मांग की जा रही है। हम न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार
लगातार हो रहे आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर अब पीड़ित संविदा परिचालकों ने उत्तर प्रदेश सरकार, परिवहन निगम के उच्च अधिकारियों और जिलाधिकारी से मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें उनका हक नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। फिलहाल, यह मामला जालौन के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।






