जालौन: उरई डिपो में इलेक्ट्रिक बसों की किल्लत, स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री से लगाई सुगम और सस्ते सफर की गुहार

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने के दावों के बीच, जालौन जिले का एक बड़ा हिस्सा अभी भी आधुनिक ई-बस सेवा से महरूम है। नगर और क्षेत्र के नागरिकों ने जालौन-उरई मार्ग पर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मांग को लेकर अब सीधे मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां प्रदेश के अन्य जिलों में अत्याधुनिक बसें दौड़ रही हैं, वहीं जालौन के यात्रियों को आज भी पुरानी और खटारा बसों या महंगे निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पर्यावरण और जेब दोनों पर भारी पड़ रहा सफर
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) ने हाल के वर्षों में पुखरायां से कानपुर जैसे मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन शुरू किया है। इन बसों की सबसे बड़ी विशेषता इनका ‘जीरो एमिशन’ होना और बेहद कम किराया है। हालांकि, जालौन नगर के निवासियों के लिए यह सुविधा अभी भी एक सपना बनी हुई है।
क्षेत्रीय नागरिक अशफाक राईन और प्रतीकांत चंसौलिया ने बताया कि जालौन से जिला मुख्यालय उरई तक प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छात्र, व्यापारी और कर्मचारी आवागमन करते हैं। वर्तमान में उपलब्ध सार्वजनिक परिवहन के साधन न केवल अपर्याप्त हैं, बल्कि निजी बसों का किराया भी आम आदमी की कमर तोड़ रहा है। स्वयं के वाहनों (दोपहिया और चौपहिया) से जाने पर ईंधन का भारी खर्च और बढ़ता प्रदूषण दोहरी मार दे रहा है।
विभागीय उदासीनता: ‘डिपो में बसें ही नहीं’
हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर पूर्व में भी प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। वैभव दीक्षित और आशीष जैसे जागरूक युवाओं ने बताया कि पिछली शिकायतों के निस्तारण में विभाग की ओर से यह तर्क दिया गया था कि “उरई डिपो में वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध नहीं हैं।”
इस जवाब से असंतुष्ट होकर अब नागरिकों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। अकरम सिद्दीकी और अन्य स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि शासन स्तर से उरई डिपो को नई इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की जाती हैं, तो न केवल जालौन-उरई मार्ग, बल्कि अन्य ग्रामीण अंचलों के यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
इलेक्ट्रिक बसों से बदल सकती है तस्वीर
इलेक्ट्रिक बसों की मांग के पीछे कई ठोस कारण हैं:
- किराये में कमी: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ई-बसों का किराया काफी किफायती होता है।
- प्रदूषण पर लगाम: इलेक्ट्रिक वाहन होने के कारण यह कार्बन उत्सर्जन को शून्य कर देते हैं, जिससे जिले की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
- सड़क सुरक्षा और सुविधा: नई बसें जीपीएस और पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस होती हैं, जिससे महिला यात्रियों के लिए सफर सुरक्षित हो जाता है।
मुख्यमंत्री से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
जालौन के प्रबुद्ध वर्ग ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने मांग पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि उरई डिपो को पर्याप्त संख्या में बसें मिल जाती हैं, तो लोग अपने निजी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक परिवहन की ओर रुख करेंगे। इससे सड़कों पर यातायात का दबाव भी कम होगा। अब देखना यह है कि क्या शासन जालौन वासियों की इस जायज मांग पर संज्ञान लेकर जल्द ही ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ का तोहफा देता है या यात्रियों को अभी और लंबा इंतजार करना होगा।







