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नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की: शहजादपुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

जालौन के शहजादपुरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते श्रद्धालु और व्यासपीठ पर विराजमान भागवताचार्य नित्यकिशोर पुरोहित

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन। जनपद के क्षेत्रीय ग्राम शहजादपुरा में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। अवसर है सुशील माहेश्वरी के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का, जहाँ कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव (जन्मोत्सव) का प्रसंग सुनाया गया। जैसे ही भगवान के जन्म की कथा शुरू हुई, पूरा वातावरण ‘जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे।

​अधर्म के विनाश हेतु हुआ प्रभु का अवतार

​वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध भागवताचार्य नित्यकिशोर पुरोहित ने व्यासपीठ से कथा का वाचन करते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर होता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि द्वापर युग में जब कंस के अत्याचारों से पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर उठी और साधु-संतों का जीवन दूभर हो गया, तब भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में कृष्ण अवतार लिया।

​कंस के कारागार और अलौकिक चमत्कार का वर्णन

​कथा व्यास ने कंस द्वारा अपनी ही बहन देवकी और वासुदेव को कारागार में डालने की मर्मस्पर्शी घटना का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान ने कारागार जैसी कठिन परिस्थितियों में जन्म लेकर संसार को यह संदेश दिया कि ईश्वर हर परिस्थिति में अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।

​प्रसंग के दौरान उन्होंने सुनाया कि जैसे ही आधी रात को प्रभु का जन्म हुआ, कारागार के भारी भरकम द्वार स्वतः खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में चले गए और यमुना ने भी उफनते हुए जल के बीच से वासुदेव जी को मार्ग दे दिया। यह वर्णन सुनकर उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया।

​नंदोत्सव में झूमे श्रद्धालु

​श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग के साथ ही पंडाल का दृश्य गोकुल जैसा प्रतीत होने लगा। प्रतीकात्मक रूप से कान्हा के जन्म की खुशी में नंदोत्सव मनाया गया। “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भजनों पर महिलाओं और पुरुषों ने जमकर नृत्य किया। इस दौरान पुष्प वर्षा की गई और प्रसाद का वितरण हुआ।

​धार्मिक आयोजन में प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति

​इस भव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान में मुख्य यजमान परिवार सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। आयोजन को सफल बनाने में अंशू माहेश्वरी, सुशील माहेश्वरी, सुजाता माहेश्वरी और सुधीर डांगरा सहित समस्त माहेश्वरी परिवार और क्षेत्रीय ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा। कथा के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्य लाभ कमाया।

​क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति का ज्ञान होता है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

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