उरई मेडिकल कॉलेज में भारी बवाल: इलाज में देरी पर टोका तो जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदारों को पीटा, गेट पर लगाया ताला; दोनों पक्षों पर FIR दर्ज

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन) : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज से संवेदनहीनता और गुंडागर्दी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ आपातकालीन वार्ड (इमरजेंसी) में इलाज कराने आई एक घायल युवती के परिजनों (तीमारदारों) और जूनियर डॉक्टरों के बीच पर्चा बनवाने की देरी को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद इतना बढ़ा कि जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने मिलकर तीमारदारों की बेरहमी से पिटाई कर दी, बीच-बचाव करने आए पिता का मोबाइल फोन तोड़ दिया और मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला जड़कर घंटों हंगामा किया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया और देर रात तक प्रशासनिक अमला स्थिति को संभालने में जुटा रहा।
पर्चा बनवाने के विवाद से शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित बृजकिशोर गुप्ता की बेटी स्मृति सोमवार को घर में अचानक फिसलकर गिर गई थी, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और वह दर्द से तड़प रही थी। परिजन आनन-फानन में उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए उरई मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात डॉक्टरों ने घायल युवती की गंभीर स्थिति को देखने के बावजूद तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करने के बजाय, सबसे पहले पर्चा बनवाकर लाने को कहा।
परिजनों के मुताबिक, उस समय काउंटर पर पर्चा बनवाने में करीब 15 से 20 मिनट का समय लग रहा था। युवती को असहनीय दर्द में तड़पता देख उसके भाइयों ने स्टाफ से मानवीयता के आधार पर तुरंत इलाज शुरू करने की गुहार लगाई, लेकिन डॉक्टरों ने बिना पर्चे के हाथ लगाने से साफ इनकार कर दिया।
विधायक का फोन आते ही भड़के डॉक्टर, भाइयों की बेरहमी से पिटाई
जब अस्पताल प्रशासन ने मिन्नतें करने के बाद भी बात नहीं सुनी, तो पीड़ित बृजकिशोर गुप्ता ने स्थानीय उरई सदर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक गौरी शंकर वर्मा को फोन लगाकर मामले की जानकारी दी और डॉक्टरों से बात करने का अनुरोध किया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जैसे ही डॉक्टरों को पता चला कि विधायक का फोन आया है, वे सहयोग करने के बजाय बुरी तरह भड़क गए।
आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों और स्टाफ ने इसे अपनी ‘प्रतिष्ठा’ का प्रश्न बना लिया। जब युवती के भाई ने दोबारा डॉक्टरों से पर्चा आने तक प्राथमिक उपचार (First Aid) देने की मांग की, तो दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और जूनियर डॉक्टरों व स्टाफ ने मिलकर युवती के भाइयों पर हमला कर दिया और उन्हें बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। बीच-बचाव करने आए पिता बृजकिशोर ने जब विधायक से डॉक्टर की बात करानी चाही, तो डॉक्टरों ने उनका मोबाइल फोन भी छीनकर जमीन पर पटक कर तोड़ दिया।
300 मेडिकल छात्र जुटे, मुख्य गेट पर लगाया ताला
घटना की जानकारी फैलते ही मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से करीब 300 जूनियर डॉक्टर और मेडिकल छात्र लाठी-डंडों के साथ मौके पर जमा हो गए। माहौल को बिगड़ता देख डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया, जिससे अस्पताल आने-जाने वाले अन्य मरीजों और एम्बुलेंसों के पहिए भी थम गए। देर रात तक परिसर में भारी अराजकता और हंगामे का माहौल बना रहा।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय कोतवाली पुलिस समेत भारी पुलिस बल और उच्च प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद आक्रोशित डॉक्टरों और छात्रों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रण में लिया। वहीं, डॉक्टरों की पिटाई से घायल हुए युवक की हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत उरई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।
पुलिसिया कार्रवाई: दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज
इस पूरे मामले में पुलिस ने निष्पक्ष जांच की बात कही है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि मामला बेहद संवेदनशील है और दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें प्राप्त हुई हैं:
- डॉक्टरों की ओर से दर्ज मामला: सबसे पहले सोमवार रात को मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टर आराध्या नगाइच की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें बृजकिशोर गुप्ता और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मेडिकल कॉलेज परिसर में आकर अभद्रता करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, तोड़फोड़ और मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
- पीड़ित परिवार की ओर से दर्ज मामला: इसके बाद पीड़ित बृजकिशोर गुप्ता की ओर से भी डॉक्टरों के खिलाफ मारपीट, मोबाइल तोड़ने और इलाज न करने की लिखित शिकायत दी गई, जिस पर पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।






