न्याय की मिसाल: जालौन में राष्ट्रीय लोक अदालत का ऐतिहासिक सफल आयोजन, 2.36 लाख से अधिक मामलों का हुआ निपटारा

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन)। त्वरित न्याय और आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों के अंत के उद्देश्य के साथ शनिवार को जनपद जालौन में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। जनपद न्यायाधीश श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। पूरे जनपद में न्यायालयों और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से कुल 2,36,804 मामलों का निस्तारण कर आम जनता को बड़ी राहत प्रदान की गई।
भव्य शुभारंभ और दीप प्रज्ज्वलन
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे जनपद न्यायाधीश श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय पाने का सबसे सुलभ और प्रभावी माध्यम है, जहाँ ‘न कोई जीता है और न कोई हारता है’, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौता होता है। कार्यक्रम में जिले के समस्त न्यायिक अधिकारीगण और प्रशासनिक अमला उपस्थित रहा।
करोड़ों की धनराशि और पारिवारिक पुनर्मिलन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती शाम्भवी-प्रथम ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि लोक अदालत में न केवल मुकदमों का बोझ कम हुआ, बल्कि करोड़ों रुपये की धनराशि का भी निस्तारण किया गया।
- जनपद न्यायाधीश: श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह ने स्वयं 25 मुकदमों का निस्तारण किया और पक्षकारों को 1,00,45,416/- रुपये की धनराशि दिलाई।
- कुटुम्ब न्यायालय: प्रधान न्यायाधीश श्री मनोज कुमार सिंह गौतम ने 24 मामलों का निस्तारण किया, जिसमें भरण-पोषण और 05 वैवाहिक प्रीलिटिगेशन मामले शामिल थे। वहीं, अपर कुटुम्ब न्यायाधीश श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय ने 45 मुकदमों का निस्तारण कर परिवारों को टूटने से बचाया।
- मोटर दुर्घटना दावा: पीठासीन अधिकारी श्री अनिल कुमार वशिष्ठ ने 79 मामलों में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए बीमा कंपनियों से पीड़ितों को 1,84,14,000/- रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दिलाई।
विद्युत और उपभोक्ता विवादों में बड़ी राहत
विशेष न्यायाधीश (ई.सी. एक्ट) श्रीमती पारूल पंवार ने विशेष सक्रियता दिखाते हुए विद्युत अधिनियम के 393 मुकदमों का निस्तारण किया, जो बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत बनकर आया। जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्री विनोद कुमार ने 10 मुकदमों में 45,52,133/- रुपये की राहत प्रदान की। साथ ही, स्थायी लोक अदालत (पी.यू.एस.) के अध्यक्ष श्री राजवर्धन गुप्ता ने 04 महत्वपूर्ण मामलों में सुलह कराई।
न्यायिक मजिस्ट्रेटों का सराहनीय योगदान
फौजदारी और दीवानी प्रकृति के छोटे-बड़े वादों के निस्तारण में मजिस्ट्रेटों ने अहम भूमिका निभाई:
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अभिषेक खरे ने रिकॉर्ड 2909 आपराधिक वादों का निस्तारण किया।
- सिविल जज अर्पित सिंह और श्रीमती मनाली चन्द्रा ने दीवानी व फौजदारी के दर्जनों मामलों को आपसी सहमति से सुलझाया।
- कालपी, जालौन और माधौगढ़ की बाह्य तहसीलों में भी न्यायिक अधिकारियों (अभिषेक चौधरी, सुधांशु सिंह, जावेद खां, निकिता सिंह और विनय कुमार चाहर) ने सक्रियता दिखाते हुए सैकड़ों वादों का निपटारा किया।
- विभिन्न न्यायालयों द्वारा कुल 2,96,810/- रुपये अर्थदंड के रूप में सरकारी कोष में जमा कराए गए।
प्रशासनिक अमले और बैंकों की सक्रियता
न्यायालयों के अतिरिक्त जिला प्रशासन का योगदान भी अभूतपूर्व रहा। जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट और सभी उप जिला मजिस्ट्रेट (SDMs) ने राजस्व संहिता के 3145 मामलों का निपटारा किया। इसके अलावा, विभिन्न बैंकों के बकाया ऋण से संबंधित 545 मामलों में समझौता कराया गया। कुल मिलाकर प्रीलिटिगेशन प्रकृति के 2,27,345 मामले विभिन्न विभागों द्वारा निस्तारित किए गए।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय लोक अदालत का यह आयोजन जालौन की न्याय व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। 2,36,804 मामलों का एक ही दिन में निस्तारण यह दर्शाता है कि यदि प्रशासन और न्यायपालिका मिलकर प्रयास करें, तो आम आदमी को सस्ता और सुलभ न्याय मिलना मुमकिन है।







