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कुदरत की मार से कराह उठा जालौन: ओलावृष्टि से तबाह हुई रबी की फसल, किसान संघ ने ₹30 हजार प्रति एकड़ मुआवजे की उठाई मांग

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जालौन की कोंच तहसील में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई गेहूं की फसल का निरीक्षण करते भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी और एसडीएम को ज्ञापन सौंपते किसानों की भीड़।

कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कुदरत का ऐसा कहर बरपा है कि अन्नदाता की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई है। बीती 4 अप्रैल 2026 को कोंच और नदीगांव ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में हुई भीषण ओलावृष्टि, आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश ने रबी की फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। इस संकट की घड़ी में किसानों की आवाज बुलंद करते हुए ‘भारतीय किसान संघ’ ने सोमवार को तहसील मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को सौंपा।

गल्ला मंडी में जुटी किसानों की पंचायत: रणनीति पर हुई चर्चा

​तहसील परिसर पहुंचने से पहले, गल्ला मंडी कोंच में भारतीय किसान संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सक्सेना ने की, जबकि प्रांतीय अध्यक्ष साहब सिंह चौहान मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक के दौरान वक्ताओं ने ओलावृष्टि से हुए विनाशकारी दृश्यों को साझा करते हुए कहा कि गेहूं, चना और मसूर की तैयार फसलें कटने से पहले ही खेतों में बिछ गई हैं। किसानों ने प्रशासन की ढिलाई पर रोष व्यक्त करते हुए तत्काल राहत कार्यों में तेजी लाने की मांग की।

₹30 हजार प्रति एकड़ मुआवजे और ऋण माफी की मांग

​एसडीएम के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजे गए ज्ञापन में संघ ने स्पष्ट किया कि किसानों की आर्थिक कमर टूट चुकी है। संघ ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • आर्थिक सहायता: प्रभावित किसानों को कम से कम 30,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से तत्काल मुआवजा दिया जाए।
  • सर्वेक्षण में पारदर्शिता: राजस्व विभाग की टीमों द्वारा फसलों के नुकसान का निष्पक्ष और त्वरित सर्वेक्षण कराया जाए ताकि कोई भी पात्र किसान राहत से वंचित न रहे।
  • बीमा क्लेम: फसल बीमा योजना के अंतर्गत आने वाले किसानों को कागजी कार्रवाई के झंझट से बचाकर शीघ्र क्लेम राशि हस्तांतरित की जाए।
  • कर्ज माफी: जिन किसानों की फसल शत-प्रतिशत बर्बाद हो गई है, उनके सरकारी और सहकारी बैंकों के कृषि ऋण माफ किए जाएं।

बुनियादी सुविधाओं और एमएसपी पर जोर

​प्रांतीय अध्यक्ष साहब सिंह चौहान ने कहा कि आंधी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने मांग की कि क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों को युद्ध स्तर पर ठीक किया जाए और निजी नलकूपों को 24 घंटे बिजली प्रदान की जाए ताकि बची हुई फसलों को सहेजा जा सके।

​इसके अलावा, संघ ने सरकार से मांग की कि ओलावृष्टि से ‘दागी’ (damaged) हुई फसलों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बिना किसी कटौती के खरीदा जाए। इसके लिए सभी क्रय केंद्रों को तत्काल सक्रिय करने और बारदाने (बोरों) की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

प्रदर्शन में उमड़ा किसानों का हुजूम

​इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन प्रक्रिया के दौरान सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से प्रांतीय अध्यक्ष साहब सिंह, जिला मंत्री आनंद, ब्लॉक अध्यक्ष कृष्ण कुमार, मंत्री शिवराज सिंह, रघुराज, अरविंद कुमार, बृज पांडेय, बालक राम, और वैभव चौहान सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

​किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर सर्वेक्षण और राहत राशि के वितरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो किसान संघ जनपद स्तर पर बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। वर्तमान में, ओलावृष्टि के इस प्रहार ने पूरे कोंच क्षेत्र के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है।

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RAHUL

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।

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