जालौन में बड़ा सियासी विस्फोट: व्यापारियों के बाद डॉक्टरों का हल्ला बोल, भाजपा विधायक से सीधे भिड़े जूनियर डॉक्टर; मेडिकल कॉलेज बना अखाड़ा

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उरई राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में देर रात हाथों में मोमबत्तियां थामे, भाजपा विधायक गौरी शंकर वर्मा और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों का कैंडल मार्च प्रदर्शन

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई (जालौन) : उत्तर प्रदेश का जालौन जिला इस समय एक संवेदनशील सामाजिक और सियासी टकराव का मुख्य केंद्र बन चुका है। उरई राजकीय मेडिकल कॉलेज से शुरू हुआ एक मामूली विवाद अब देखते ही देखते “डॉक्टर बनाम सत्ता” की एक बेहद गंभीर और बड़ी लड़ाई में तब्दील हो गया है। इस विवाद ने पूरे क्षेत्र के राजनीतिक और प्रशासनिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। एक तरफ जहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता, स्थानीय व्यापारी और उनके समर्थक सड़कों पर उतरकर डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर हड़ताल और उग्र प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। अस्पताल परिसर से लेकर उरई की सड़कों तक केवल आक्रोश और नारेबाजी का माहौल दिखाई दे रहा है।

​भाजपा नेता से मारपीट के बाद भड़का था जनाक्रोश

​इस पूरे विवाद की चिंगारी उस वक्त सुलगी, जब राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में एक भाजपा नेता और उनके बेटे के साथ जूनियर डॉक्टरों द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने की घटना सामने आई। इस खबर के फैलते ही स्थानीय व्यापारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में उरई के मुख्य बाजार को पूरी तरह बंद कर दिया गया और व्यापारियों ने सड़क पर बैठकर जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना था कि डॉक्टरों की गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उन्होंने आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल व सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।

​पुलिस महकमे में हलचल: 30-40 डॉक्टरों पर संगीन धाराओं में FIR

​मामले की गंभीरता और कानून-व्यवस्था के बिगड़ते हालातों को देखते हुए जालौन पुलिस भी तुरंत एक्शन मोड में आ गई। पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनय कुमार सिंह के कड़े निर्देशों के बाद उरई कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए एक नामजद डॉक्टर समेत करीब 30 से 40 अज्ञात जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए। पुलिस प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से ऐसा लगा कि मामला शांत हो जाएगा, लेकिन कहानी में असली मोड़ इसके ठीक बाद आया।

​डॉक्टरों का पलटवार: आपातकालीन सेवाएं छोड़ बाकी सब ठप, निकाला कैंडल मार्च

​पुलिस प्रशासन द्वारा FIR दर्ज किए जाने की भनक लगते ही जूनियर डॉक्टरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। डॉक्टरों ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए तत्काल प्रभाव से अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान कर दिया। डॉक्टरों के इस कदम से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी (आपातकालीन) सेवाओं को छोड़कर बाकी की सभी स्वास्थ्य सेवाएं, जिनमें ओपीडी (OPD) और रूटीन चेकअप शामिल हैं, पूरी तरह ठप हो गईं। दूर-दराज से आए मरीजों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। यहीं नहीं, देर रात आक्रोशित डॉक्टरों ने एकजुटता दिखाते हुए मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर एक विशाल कैंडल मार्च निकाला और कॉलेज प्रशासन व पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​उरई सदर विधायक निशाने पर; क्यों भड़के जूनियर डॉक्टर?

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे नाटकीय और चर्चा का विषय वह मोड़ रहा, जब डॉक्टरों का यह प्रदर्शन सीधे तौर पर राजनीतिक दिशा में मुड़ गया। कैंडल मार्च और प्रदर्शन के दौरान जूनियर डॉक्टरों का गुस्सा सीधे भाजपा के स्थानीय उरई सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा पर फूट पड़ा। डॉक्टरों ने विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसने इस पूरे मामले को विशुद्ध रूप से राजनीतिक रंग दे दिया है।

​अब उरई के सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर देश के ‘धरती के भगवान’ कहे जाने वाले डॉक्टर, सत्ताधारी विधायक के खिलाफ इस कदर खुलकर मोर्चा क्यों खोल रहे हैं?

डॉक्टरों का संगीन आरोप: जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत खुद विधायक के प्रतिनिधि की बदतमीजी और दबंगई की वजह से हुई थी। डॉक्टरों ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि घटना के बाद माननीय विधायक की तरफ से डॉक्टरों पर अनुचित दबाव बनाने और फोन पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां भी दी गईं। हालांकि, दूसरी ओर विधायक पक्ष और उनके समर्थक इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे डॉक्टरों की मनमानी छुपाने का पैंतरा बता रहे हैं।

​अंदरूनी सियासत: FIR की जद में आए डॉक्टर भी ‘रसूखदार’

​इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प और आंतरिक राजनीतिक पहलू भी सामने आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस डॉक्टर आराध्य नगाइच को इस मामले में मुख्य रूप से नामजद करते हुए FIR दर्ज की गई है, वह भी कोई आम शख्सियत नहीं हैं। चर्चा है कि डॉक्टर आराध्य भी भारतीय जनता पार्टी के ही एक बेहद कद्दावर और बड़े नेता के करीबी रिश्तेदार हैं। इस आंतरिक रसूख के जुड़ाव ने मामले को पार्टी के भीतर और बाहर एक बेहद पेचीदा राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

​सत्ता के दबाव और डॉक्टरों के स्वाभिमान की जंग

​कुल मिलाकर, जो विवाद शुरुआत में मेडिकल कॉलेज के भीतर डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच एक आम झड़प या गलतफहमी जैसा प्रतीत हो रहा था, वह अब पूरी तरह से “डॉक्टर बनाम नेता” और “स्वाभिमान बनाम सत्ता के रसूख” की एक बड़ी जंग का रूप ले चुका है। एक तरफ सत्ता के गलियारों से जुड़ा भारी दबाव और जनसमर्थन का प्रदर्शन है, तो दूसरी तरफ अपने मान-सम्मान की लड़ाई लड़ रहे जूनियर डॉक्टरों का अडिग रुख है।

​अब समूचे बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश की नजरें जालौन के जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस बुरी तरह सुलग रहे विवाद को किस कुशलता और निष्पक्षता के साथ संभालता है। क्या दोनों पक्षों के बीच कोई मध्यस्थता होगी और वे कदम पीछे खींचेंगे, या फिर उरई मेडिकल कॉलेज का यह कांड आने वाले दिनों में सूबे की राजनीति में कोई और बड़ा विस्फोटक मोड़ लेकर आएगा? यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।

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