जालौन की ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों से हड़कंप, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार, उच्च स्तरीय जांच की मांग

विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप, शिकायत पत्र सौंपकर की कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट-मुहम्मद साजिद जालौन |UPSAMVAD
माधौगढ़(जालौन): जालौन जिले के माधौगढ़ विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिरसा दोगढ़ी में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। गांव के कई लोगों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को शिकायती पत्र सौंपकर पिछले पांच वर्षों में पंचायत स्तर पर कराए गए विकास कार्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत निधि और मनरेगा योजना के तहत हुए कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां की गई हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो गई है।
एक ही व्यक्ति के खाते में लाखों रुपये भुगतान का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत के विभिन्न कार्यों का भुगतान अलग-अलग मदों के नाम पर एक ही व्यक्ति के बैंक खाते में किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराने, सफाई कार्य, मजदूरी, पुलिया निर्माण, सड़क निर्माण तथा रंगाई-पुताई जैसे विभिन्न कार्यों के नाम पर लगभग 7 लाख 16 हजार 189 रुपये का भुगतान किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही व्यक्ति को इतने अलग-अलग कार्यों के लिए भुगतान किया जाना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला संदिग्ध प्रतीत होता है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मनरेगा योजना में भी अनियमितताओं के आरोप
ग्रामीणों ने मनरेगा योजना के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति एवं उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर जॉब कार्ड जारी कर मजदूरी भुगतान किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मनरेगा के तहत हुए सभी भुगतान और कार्यों का सत्यापन कराया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मजदूरी का भुगतान वास्तविक श्रमिकों को हुआ या नहीं।
सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग का भी आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत की कूड़ा गाड़ी के निजी उपयोग किए जाने का भी आरोप लगाया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि सरकारी वाहन को कथित रूप से निजी परिसर में रखा जा रहा है, जो सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।
इसके अलावा हाल ही में पंचायत को उपलब्ध कराए गए सामाजिक कैमरे और वाटर कूलर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन्हें सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाने के बजाय निजी परिसर में स्थापित कर दिया गया है, जिससे आम लोगों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
निष्पक्ष जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग
ग्रामीणों ने सूचना का अधिकार अधिनियम, पंचायत राज अधिनियम, मनरेगा अधिनियम तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत विभिन्न कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पंचायत के वित्तीय लेन-देन का विशेष ऑडिट कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं कराई गई तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और ग्रामीण विकास की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर और कितनी गंभीरता से की जाती है।








