उरई में इंसानियत शर्मसार: अनिका अस्पताल में मासूम की मौत के बाद शव को कमरे में कर दिया बंद, रोते बिलखते परिजनों को छोड़ ताला लगाकर भागे ‘यमराज’ रूपी डॉक्टर!

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन) : बुंदेलखंड के जालौन से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और मानवता को तार-तार करने वाली खबर सामने आई है, जिसने डॉक्टरों को भगवान का रूप मानने वाले समाज को झकझोर कर रख दिया है। उरई कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ‘अनिका अस्पताल’ में इलाज के दौरान एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। लेकिन इस त्रासदी के बाद जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के मुंह पर करारा तमाचा है। अस्पताल के संवेदनहीन स्टाफ और डॉक्टरों ने अपनी खाल बचाने के लिए मृत मासूम के शव को एक कमरे में बंद कर बाहर से ताला जड़ दिया और मौके से फरार हो गए। बाहर बिलखते माता-पिता गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन चंद रुपयों के लालच में अंधी हो चुकी डॉक्टरों की फौज का दिल नहीं पसीजा।
इलाज के नाम पर खेला गया खूनी खेल, मासूम ने तोड़ा दम

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जालौन के उरई स्थित अनिका अस्पताल में एक बेबस परिवार अपने कलेजे के टुकड़े को इलाज के लिए लेकर आया था। परिजनों ने डॉक्टरों पर पूरा भरोसा जताया और अपनी गाढ़ी कमाई उनके हाथों में सौंप दी। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों ने इलाज में घोर लापरवाही बरती। मासूम की हालत बिगड़ती चली गई, लेकिन डॉक्टरों ने समय रहते सही कदम उठाने के बजाय मामले को दबाए रखा। आखिरकार, उस मासूम ने अस्पताल के बिस्तर पर ही दम तोड़ दिया। मौत की खबर सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
शव को बनाया बंधक: बंद ताले में कैद रही मासूम की लाश
खोजी पत्रकारिता के दौरान जो सबसे खौफनाक सच सामने आया है, वह अस्पताल प्रशासन की हैवानियत को उजागर करता है। जैसे ही डॉक्टरों को अहसास हुआ कि बच्चा दम तोड़ चुका है और अब परिजनों का गुस्सा भड़क सकता है, उन्होंने कानूनी कार्रवाई और हंगामे से बचने के लिए एक ऐसी साजिश रची जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मासूम के शव को परिजनों को सौंपने के बजाय, उसे अस्पताल के भीतर ही एक कमरे में रखकर बाहर से बड़ा सा ताला लटका दिया। यह घटना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और मृत देह का अपमान है।
अस्पताल के बाहर बिलखता रहा परिवार, मौके से ‘यमराज’ हुए फरार
एक तरफ अस्पताल के भीतर मासूम का बेजान शरीर लोहे के ताले के पीछे कैद था, तो दूसरी तरफ अस्पताल की चौखट पर बदहवास माता-पिता और रिश्तेदार छाती पीटकर रो रहे थे। वे बस अपने बच्चे की आखिरी सूरत देखने और उसका शव पाने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। अपनी इस घिनौनी करतूत को अंजाम देने के बाद, अनिका अस्पताल का पूरा स्टाफ और मुख्य डॉक्टर अस्पताल के पिछले रास्ते से रफूचक्कर हो गए। डॉक्टरों का यह पलायन खुद उनके अपराध को कबूल करने जैसा है।
उरई कोतवाली पुलिस पर टिकी निगाहें, क्या मिलेगा न्याय?
घटना की सूचना मिलते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। उरई कोतवाली क्षेत्र का यह मामला अब तूल पकड़ चुका है। स्थानीय लोगों की भारी भीड़ अस्पताल के बाहर जमा हो गई है और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी हो रही है। पुलिस बल मौके पर पहुंच चुका है और ताला तुड़वाकर शव को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इन रसूखदार प्राइवेट डॉक्टरों पर सख्त से सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा? क्या सीएमओ जालौन इस ‘डेथ फैक्ट्री’ पर हमेशा के लिए ताला लगाएंगे? उत्तर प्रदेश संवाद इस मामले की हर एक परत को खोलता रहेगा, जब तक कि उस बेबस मां-बाप को न्याय नहीं मिल जाता।






