मौत का लाइव जाल: जालौन में बिजली विभाग की खूनी लापरवाही, हफ़्तों से ज़मीन पर पड़े हाईटेंशन तार में अचानक फूंक दिया करंट, ज़िंदगी मौत से जूझी!

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खेत में जमीन पर टूटा पड़ा हाईटेंशन लाइन का बिजली का तार, जिसके आसपास सूखी पत्तियां और जली हुई घास बिखरी हुई है, पृष्ठभूमि में ग्रामीण और दमकल विभाग की गाड़ी खड़ी है।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन : उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग (UPPCL) के आला अधिकारी चाहे जितने भी चाक-चौबंद दावों की कागज़ी ज़मीन तैयार कर लें, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जालौन जिले के कुठौंदा बुजुर्ग गांव से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बिजली विभाग को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। विभाग की घोर संवेदनहीनता और ‘सब ठीक है’ वाले ढर्रे ने एक मासूम नौजवान को मौत के मुंह में धकेल दिया था। गनीमत रही कि वक्त रहते कदम उठा लिए गए, वर्ना एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ने में बिजली विभाग ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

​ग्रामीण चिल्लाते रहे, विभाग सोता रहा: एक हफ्ते पहले दी थी टूटे तार की चेतावनी

​इस पूरे मामले की जब हमारी टीम ने परत-दर-परत पड़ताल की, तो रूह कंपा देने वाला सच सामने आया। कुठौंदा बुजुर्ग निवासी ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दिनों आई तेज आंधी-तूफान के कारण खेत के ऊपर से गुजर रही मौत की लाइन यानी हाईटेंशन तार टूटकर सीधे जमीन पर आ गिरी थी। ग्रामीण गजेंद्र सिंह और जवान सिंह ने ऑन-कैमरा बेहद आक्रोशित लहजे में बताया कि उन्होंने इस टूटे हुए और बेहद संवेदनशील तार की सूचना पूरे एक सप्ताह पहले ही स्थानीय बिजली विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को दे दी थी।

​लेकिन, एयरकंडीशंड कमरों में बैठकर फाइलों को सरकाने वाले बाबुओं और इंजीनियरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। तार हफ़्तों तक ज़मीन पर लावारिस पड़ा रहा। विभाग इस बात का इंतज़ार कर रहा था कि जब तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं हो जाती, तब तक वे अपनी नींद से नहीं जागेंगे।

​मौत का लाइव एनकाउंटर: बिना सूचना अचानक दौड़ाई गई हज़ारों वोल्ट की बिजली

​घटना गुरुवार दोपहर करीब दो बजे की है। कुठौंदा बुजुर्ग गांव के रहने वाले हिमांशु तिवारी अपने खेत में मजदूरों के साथ मूंग की फसल कटवा रहे थे। चूंकि तार कई दिनों से बेजान पड़ा था और उसमें बिजली की सप्लाई बंद थी, इसलिए मजदूर और खेत मालिक बिना किसी डर के वहां काम कर रहे थे। दोपहर के समय हिमांशु तिवारी खेत का मुआयना करते हुए जैसे ही उस टूटे पड़े तार के नजदीक पहुंचे, ठीक उसी सेकेंड बिजली विभाग के सब-स्टेशन से बिना किसी पूर्व चेकिंग या सूचना के, उस लाइन में हज़ारों वोल्ट का करंट दौड़ा दिया गया।

​जैसे ही हिमांशु का पैर उस तार से छुआ, एक जोरदार धमाका हुआ। हिमांशु तिवारी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए और दूर जा गिरे। मौके पर मौजूद मजदूरों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। यह सीधा-सीधा बिजली विभाग द्वारा बुना गया एक ऐसा मौत का जाल था, जिसमें कोई भी फंस सकता था।

​खेत में भड़की भीषण आग, दमकल और यूपी-112 ने संभाला मोर्चा

​हादसा सिर्फ करंट लगने तक ही सीमित नहीं रहा। हाईटेंशन लाइन में जैसे ही करंट आया, तार से निकली भयंकर चिंगारियों ने खेत में पड़ी सूखी पत्तियों, डालियों और फसल के अवशेषों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरे खेत में आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। अफरा-तफरी के इस माहौल में खेतों में काम कर रहे जांबाज मजदूरों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत यूपी-112 और बिजली विभाग को फोन खटखटाए।

​भारी दबाव के बाद आखिरकार बिजली की सप्लाई बंद की गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर फाइटर्स ने ग्रामीणों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद खेत में फैली आग पर काबू पाया, जिससे एक बहुत बड़ी आर्थिक तबाही होने से बच गई।

​अस्पताल में जिंदगी की जंग और ग्रामीणों का सुलगता आक्रोश

​गंभीर रूप से झुलसे हिमांशु तिवारी को आनन-फानन में नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। डॉक्टरों की मुस्तैद टीम ने तुरंत उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। किस्मत अच्छी थी कि करंट का झटका सीधे दिल पर असर नहीं कर पाया, जिसके चलते प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है, लेकिन मानसिक और शारीरिक आघात गहरा है।

​इस घटना के बाद से पूरे कुठौंदा बुजुर्ग गांव में बिजली विभाग के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि बिजली विभाग के लापरवाह अधिकारियों द्वारा किया गया ‘प्रयास-ए-कत्ल’ है। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पोर्टल और उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत कर दोषी लाइनमैन और संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई और निलंबन की मांग की है। देखना यह होगा कि इस खूनी लापरवाही पर शासन क्या कड़ा हंटर चलाता है।

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