जालौन में ‘पीले पंजे’ का महाप्रहार: कदौरा बाजार में अवैध साम्राज्य पर गरजा कालपी एसडीएम का बुलडोजर, भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों में हाहाकार!

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जालौन के कदौरा कस्बे के मुख्य बाजार में अवैध अतिक्रमण पर चलते पीले पंजे (बुलडोजर) का एक दृश्य, जहां सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात है और मलबे के पास स्थानीय लोगों व प्रशासनिक अधिकारियों की भीड़ जमा है।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कदौरा (जालौन) : उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों और सरकारी जमीनों पर कुंडली मारकर बैठे रसूखदारों के खिलाफ शासन का हंटर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को बुंदेलखंड के जालौन जिले के कदौरा कस्बे में प्रशासनिक अमले ने एक ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसने पूरे इलाके के अतिक्रमणकारियों की नींद उड़ा दी। एसडीएम कालपी के नेतृत्व में जब राजस्व विभाग, नगर पंचायत और भारी पुलिस बल की संयुक्त टीम ने कदौरा मुख्य बाजार में एंट्री की, तो वहां हड़कंप मच गया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या पैरवी के फोन घुमाता, प्रशासन के साथ आए भारी-भरकम बुलडोजर के इंजन ने दहाड़ना शुरू कर दिया था। सरकारी जमीन और सड़कों को अपनी जागीर समझ चुके लोगों में अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता था।

​रसूखदारों के अवैध चबूतरे और टीनशेड मिनटों में जमींदोज

​खोजी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कदौरा कस्बे के मुख्य बाजार और सार्वजनिक मार्गों पर लंबे समय से कुछ स्थानीय दुकानदारों और रसूखदारों ने अवैध रूप से पक्के चबूतरे, दुकानें और बड़े-बड़े टीनशेड तान रखे थे। नगर पंचायत की इस बेशकीमती जमीन पर कब्जे की शिकायतें लगातार जिला प्रशासन को मिल रही थीं। गुरुवार की सुबह जैसे ही बुलडोजर ने अपनी कार्रवाई शुरू की, वैसे ही अवैध रूप से खड़े किए गए ढांचे ताश के पत्तों की तरह ढहने लगे। देखते ही देखते सड़क के दोनों किनारों को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त करा दिया गया। इस अचानक और आक्रामक कार्रवाई से पूरे बाजार क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बनी रही, लेकिन भारी पुलिस बल की मुस्तैदी के चलते किसी भी उपद्रवी को कानून हाथ में लेने का मौका नहीं मिला।

​”पहले दिया था नोटिस, नहीं सुधरे तो भुगतना पड़ा अंजाम” – एसडीएम कालपी

​इस पूरे हाई-वोल्टेज एक्शन का नेतृत्व कर रहे कालपी के उपजिलाधिकारी (SDM) ने बेहद कड़े शब्दों में अतिक्रमणकारियों को चेतावनी दी है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद संवाददाताओं से बात करते हुए एसडीएम कालपी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है, बल्कि कानून के दायरे में रहकर की गई है। प्रशासन ने अवैध निर्माण करने वाले सभी लोगों को पहले ही वैधानिक नोटिस जारी कर खुद से कब्जा हटाने का पर्याप्त समय दिया था। इसके बावजूद, आदेश को हल्के में लेने और सरकारी जमीन खाली न करने की हठधर्मिता के कारण प्रशासन को अंततः यह कठोर कदम उठाना पड़ा। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं कि सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में यदि किसी ने दोबारा कब्जा करने की हिमाकत की, तो उनके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।

​जनता ने ली राहत की सांस; कहा- “रोज-रोज के नरकीय जाम से मिली मुक्ति”

​दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ अतिक्रमणकारियों के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थीं, वहीं दूसरी तरफ कस्बे के आम नागरिकों और राहगीरों ने इस कार्रवाई का खुले दिल से स्वागत किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन अवैध कब्जों के कारण मुख्य बाजार की सड़कें बेहद संकरी हो चुकी थीं। हालत यह थी कि पैदल निकलना भी दूभर था और हर वक्त बाजार में नरकीय जाम की स्थिति बनी रहती थी, जिससे अक्सर एंबुलेंस और स्कूली वाहन घंटों फंसे रहते थे। कस्बावासियों ने प्रशासनिक टीम की इस निर्भीक कार्रवाई को उचित ठहराते हुए मांग की है कि इस खाली कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा न होने पाए।

​अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है, आगे और बढ़ेगा कार्रवाई का दायरा

​प्रशासनिक सूत्रों से मिली गोपनीय जानकारी के अनुसार, कदौरा कस्बे में चलाया गया यह अभियान महत एक बानगी है। कालपी तहसील प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण विरोधी यह महा-अभियान यहीं थमने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में कदौरा के अन्य अंदरूनी इलाकों और कालपी क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी अंचलों में भी उन अवैध निर्माणों को चिह्नित कर लिया गया है, जो सरकारी विभागों या तालाबों की जमीनों पर बने हुए हैं। प्रशासन की इस आक्रामक और जीरो-टॉलरेंस वाली नीति ने साफ संदेश दे दिया है कि बुंदेलखंड की धरती पर अब अवैध कब्जेदारों और भू-माफियाओं के दिन पूरी तरह लद चुके हैं।

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