सनसनीखेज: जालौन में दरिंदगी की हदें पार! 5 दरिंदों ने नाबालिग दलित बेटी को कार में नोंचा, गुजरात में बेचने की थी साजिश; रेंढ़र पुलिस पर लगा ₹50,000 लेकर आरोपियों को छोड़ने का संगीन आरोप

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जालौन के रेंढ़र थाने के बाहर रोते-बिलखते दलित पीड़िता और उसके असहाय पिता, पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश पुलिस की गाड़ी और थाना परिसर का मुख्य बोर्ड दिखाई दे रहा है, जो कानून-व्यवस्था की लाचारी को दर्शाता है।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन (उत्तर प्रदेश)। बुंदेलखंड के जालौन जिले से एक ऐसी रूह कँपा देने वाली और सिस्टम को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने उत्तर प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘रामराज्य’ के दावों की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी हैं। जिले के रेंढ़र थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग दलित बालिका के साथ न सिर्फ पांच रसूखदार दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया, बल्कि उसे गुजरात ले जाकर बेचने की खौफनाक साजिश भी रची। लेकिन इस पूरी घटना का सबसे काला और घिनौना अध्याय तब लिखा गया, जब न्याय की रक्षक पुलिस ही भक्षक बन गई। पीड़िता का आरोप है कि रेंढ़र थाना प्रभारी ने उसकी आँखों के सामने ही आरोपियों से 50 हजार रुपये की रिश्वत ली और उन्हें थाने से ससम्मान बरी कर दिया।

​’चमरिया को गुजरात में बेच देंगे…’: धोखे से अपहरण और कार में सामूहिक हैवानियत

​खोजी पत्रकारिता में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, यह खौफनाक वारदात 1 जून की है। पीड़िता के पिता रामशंकर दोहरे (बदला हुआ नाम) ने रोते हुए बताया कि उस दिन पूरा परिवार खेतों में मूंग की फराल काटने गया था। 14 वर्षीय नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। इसी का फायदा उठाकर गांव का ही एक युवक साजिश के तहत उनके घर पहुंचा। उसने मासूम से झूठ बोला कि उसके पिता ने उसे खेत पर ‘प्रसाद बढ़ाने’ के पैसे लेकर बुलाया है।

​मासूम जैसे ही गांव से बाहर निकली, पहले से घात लगाए बैठे राकेश और अनिल ने उसका मुंह दबा लिया। दोनों ने उसे पास खड़ी एक सफेद रंग की कार में फेंक दिया, जहाँ रामजी उर्फ छोटे और कार का ड्राइवर पहले से मौजूद थे। चलती कार में पांचों दरिंदों ने बारी-बारी से उस मासूम की अस्मत को तार-तार किया। पीड़िता के मुताबिक, आरोपी आपस में कह रहे थे, “चलो साली चमरिया वाली को गुजरात ले जाकर कहीं बेच देंगे, किसी को पता भी नहीं चलेगा।” यह बयान साफ करता है कि यह सिर्फ एक बलात्कार नहीं, बल्कि मानव तस्करी का एक बड़ा संगठित रैकेट था।

​डायल 112 ने तो बचाया, लेकिन थाने पहुंचते ही बदल गई ‘खाकी की नीयत’

​जब पिता को बेटी के लापता होने की खबर मिली, तो उन्होंने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए ‘डायल 112’ को सूचित किया। पीआरवी (PRV) की सक्रियता के कारण पुलिस ने नावली के पास घेराबंदी करके कार को रोक लिया, पीड़िता को सकुशल छुड़ाया और पांचों आरोपियों को दबोचकर रेंढ़र थाने ले आई। यहाँ तक की कहानी में पुलिस हीरो थी, लेकिन असली खेल थाने की चारदीवारी के भीतर शुरू हुआ।

​पीड़िता और उसके पिता का सीधा आरोप है कि रेंढ़र थाना प्रभारी के सामने जब आरोपियों के रसूख और पैसे का वजन पड़ा, तो कानून की धाराएं ढीली हो गईं। पीड़िता ने अपनी बाइट में रोते हुए कहा, “साहब, मेरी आंखों के सामने दरोगा जी ने उन लोगों से 50 हजार रुपये नकद लिए और उन्हें हवालात से बाहर निकाल दिया।”

​एफआईआर गायब, जांच का झांसा और खुलेआम घूम रहे मुल्जिम दे रहे मौत की धमकी

​इस मामले में पुलिसिया संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखिए कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी रेंढ़र पुलिस ने मामले में कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है। पिता रामशंकर दोहरे ने बताया कि उन्होंने थाने में लिखित प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे थाना प्रभारी ने अपने पास रख लिया और ‘जांच की जा रही है’ का रटा-रटाया झांसा देकर उन्हें भगा दिया।

​आज स्थिति यह है कि सामूहिक दुष्कर्म और मानव तस्करी जैसे संगीन जुर्म के आरोपी गांव में खुलेआम सीना तानकर घूम रहे हैं। पीड़िता के परिवार को लगातार केस वापस लेने और जुबान बंद रखने के लिए जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा पीड़ित परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है।

​सत्ता और आला अधिकारियों से सीधे सुलगते सवाल:

​इस खोजी रिपोर्ट के जरिए ‘यूपी संवाद’ प्रशासन से कुछ तीखे और सीधे सवाल पूछता है:

  • ​क्या यूपी में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम दलित बेटियों को उठाने और बेचने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं?
  • ​क्या रेंढ़र थाना प्रभारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) को ठंडे बस्ते में डालने के जुर्म में तत्काल सस्पेंशन और जेल की कार्रवाई होगी?
  • ​क्या जालौन पुलिस के आला अधिकारी इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा?

​इस मामले में अब देखना यह है कि लखनऊ में बैठे आला हुक्मरान और जालौन के पुलिस कप्तान इस गंभीर घूसकांड और गैंगरेप मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं। जब तक इन खाकी वर्दी वाले ‘दलालों’ और दरिंदों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक महिला सुरक्षा के सारे दावे खोखले ही रहेंगे

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