जालौन में दर्दनाक हादसा: भाई की डांट से नाराज होकर दौड़ रहे 13 वर्षीय मासूम की खुले कुएं में गिरने से मौत, परिजनों ने बिना पुलिस को सूचना दिए किया अंतिम संस्कार

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जालौन के कदौरा क्षेत्र में स्थित एक पुराना और खुला हुआ कुआँ, जहाँ ग्रामीणों की भीड़ और शोक संतप्त परिजन एकत्रित हैं।

जालौन के कदौरा क्षेत्र में स्थित एक पुराना और खुला हुआ कुआँ, जहाँ ग्रामीणों की भीड़ और शोक संतप्त परिजन एकत्रित हैं।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक खुले कुएं ने मासूम की जिंदगी को हमेशा के लिए लील लिया। मामला कदौरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगवा डेरा गांव का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच एक 13 वर्षीय मासूम बच्चा बाहर खेल रहा था। लू और तेज धूप के खतरे को देखते हुए उसके बड़े भाई ने उसे डांटते हुए घर के अंदर जाने को कहा। भाई की यह डांट मासूम को इतनी नागवार गुजरी कि वह नाराज होकर रोते हुए घर की तरफ तेजी से दौड़ने लगा।

संतुलन बिगड़ने से खुले कुएं में गिरा मासूम

​दौड़ते समय बदहवास मासूम का अचानक संतुलन बिगड़ गया। दुर्भाग्यवश, रास्ते के समीप ही एक गहरा और खुला हुआ कुआँ स्थित था। रफ्तार तेज होने के कारण बच्चा खुद को संभाल नहीं पाया और सीधे गहरे कुएं में जा गिरा। पानी और गहराई के चलते वह तुरंत ही उसमें समा गया।

​दूसरी ओर, जब बड़ा भाई पीछे-पीछे घर पहुँचा और छोटा भाई वहाँ नहीं मिला, तब उसे अनहोनी की आशंका हुई। उसने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों को पूरी बात बताई कि डांटने के बाद वह नाराज होकर भागा है। इस सूचना के बाद परिजनों के होश उड़ गए और वे आनन-फानन में रोते-बिलखते हुए उसी रास्ते की तरफ दौड़े।

ग्रामीणों ने की भारी मशक्कत, निकाला शव

​मासूम के कुएं में गिरने की खबर पूरे नगवा डेरा गांव में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते घटनास्थल पर ग्रामीणों का भारी हुजूम जमा हो गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। अंधेरे और गहरे कुएं से बच्चे को बाहर निकालने के लिए ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लगभग एक घंटे की कड़ी और थका देने वाली मशक्कत के बाद आखिरकार मासूम को कुएं से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दम घुटने और पानी में डूबने के कारण बच्चे की दर्दनाक मौत हो चुकी थी। बच्चे का निष्प्राण शरीर देखते ही परिवार में कोहराम मच गया और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।

बिना कानूनी कार्रवाई के किया गया अंतिम संस्कार

​इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब परिजनों ने इस हादसे की सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन को नहीं दी। अमूमन ऐसे मामलों में पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए भेजती है और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। परंतु, इस घटना से पूरी तरह टूट चुके और कानूनी प्रक्रियाओं से बचने की चाह में परिजनों ने स्थानीय पुलिस को भनक लगे बिना ही आनन-फानन में मृत मासूम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

एक बड़ा सवाल: ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खुले और असुरक्षित कुएं मासूमों के लिए मौत का काल साबित हो रहे हैं। इस प्रशासनिक और व्यक्तिगत लापरवाही की कीमत आखिरकार एक मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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