लखनऊ अग्निकांड के बाद एक्शन में सरकार: जालौन में जिला प्रशासन का बड़ा हंटर, एक दर्जन से अधिक कोचिंग सेंटर सील

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन (उत्तर प्रदेश)। राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हाल ही में हुई भीषण और दर्दनाक अग्निकांड की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बेहद कड़ा रुख अख्तियार करने और सख्त निर्देश जारी करने के बाद, पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। प्रदेश भर में बेसमेंट में अवैध रूप से संचालित और बिना फायर एनओसी (अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र) के चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक व्यापक और सघन सुरक्षा अभियान छेड़ दिया गया है। इसी कड़ी में बुधवार को बुंदेलखंड के जालौन जनपद में जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है।
जिलाधिकारी और एसपी के निर्देशन में 5 संयुक्त टीमों का गठन
सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे और छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने के लिए जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। जनपद में तहसीलवार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पांच विशेष संयुक्त जांच टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में उरई विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड), राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को शामिल किया गया है। इन पांचों टीमों ने बुधवार सुबह से ही जनपद के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी, जिससे अवैध रूप से कोचिंग संचालित करने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया।
पहले दिन की जांच में ही खुली पोल, एक दर्जन से अधिक संस्थान सील
इस महा-अभियान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि प्रशासन का मुख्य फोकस सबसे पहले ऐसे कोचिंग संस्थानों का चिन्हांकन करना है जो भूमिगत (बेसमेंट) चल रहे हैं या फिर संकरी गलियों में स्थित हैं।
जांच के दौरान मुख्य रूप से तीन बिंदुओं को परखा जा रहा है:
- क्या कोचिंग संस्थान वैध अनुमति और पंजीकरण के साथ संचालित हो रहा है?
- क्या संस्थान के पास अग्निशमन विभाग की वैध एनओसी (Fire NOC) और पर्याप्त जीवन रक्षक उपकरण मौजूद हैं?
- क्या कोई कोचिंग सेंटर अवैध और असुरक्षित तरीके से बेसमेंट में चलाया जा रहा है?
बुधवार को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे एक दर्जन से अधिक बड़े और पंजीकृत कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच में ये सभी संस्थान सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह से फेल साबित हुए। किसी भी संस्थान में न तो आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की उचित व्यवस्था थी और न ही आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद थे। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक दर्जन से अधिक कोचिंग सेंटरों को मौके पर ही सील कर दिया।
’मिशन मोड’ पर रहेगा अभियान, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए यह साफ संदेश दे दिया है कि यह महज एक औपचारिकता या एक दिन की कार्रवाई नहीं है। निरीक्षण और सीलिंग का यह सिलसिला आने वाले दिनों में लगातार और अधिक आक्रामक रूप से जारी रहेगा।
”भविष्य में लखनऊ जैसी किसी भी अप्रिय और हृदयविदारक घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। यह अभियान तब तक थमेगा नहीं, जब तक कि जनपद के सभी अवैध, मानकविहीन और असुरक्षित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ पूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो जाती। छात्रों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है और सुरक्षा मानकों से किसी भी सूरत में, किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
— राजेश कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी, जालौन
जागरूकता अभियान भी शुरू, छात्रों से सतर्क रहने की अपील
कार्रवाई और सीलिंग के साथ-साथ जिला प्रशासन द्वारा समानांतर रूप से एक जन-जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों से भी भावुक और सतर्क रहने की अपील की है। मुनादी और नोटिस के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अपने बच्चों को केवल उन्हीं इमारतों या संस्थानों में पढ़ने के लिए भेजें, जहां पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, चौड़े आपातकालीन निकास और पुख्ता अग्निशमन प्रबंध मौजूद हों। प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।






