जालौन में सफाईकर्मी से मारपीट पर भड़के कर्मचारी; उरई कोतवाली के बाहर कूड़ा गाड़ियाँ खड़ी कर लगाया चक्काजाम, मुकदमा दर्ज होने के बाद शांत हुआ मामला

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन)। वार्ड नंबर 13 में कूड़ा कलेक्शन के दौरान हुआ विवाद, पीड़ित सफाईकर्मी ने बयां की आपबीती, पुलिस के आश्वासन पर खुला जाम।
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई मुख्यालय से सोमवार को एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ उरई नगर पालिका परिषद के एक सफाईकर्मी के साथ कुछ स्थानीय दबंगों द्वारा मारपीट किए जाने के विरोध में सैकड़ों सफाई कर्मचारी लामबंद हो गए। घटना से आक्रोशित कर्मचारियों ने न केवल काम बंद किया, बल्कि उरई कोतवाली के मुख्य द्वार के सामने अपनी कूड़ा एकत्रित करने वाली हाथगाड़ियों और वाहनों को आड़ा-तिरछा खड़ा करके जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस अचानक हुए चक्काजाम के कारण शहर की मुख्य सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
वार्ड नंबर 13 में ड्यूटी के दौरान हुई वारदात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह उरई नगर पालिका परिषद में तैनात सफाई कर्मचारी संतोष कुमार रोज़ की तरह वार्ड नंबर 13 में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण (वेस्ट कलेक्शन) का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों के साथ उनका विवाद हो गया। विवाद इस कदर बढ़ा कि उक्त आरोपियों ने कानून को हाथ में लेते हुए सफाईकर्मी संतोष कुमार के साथ अभद्रता की और उनके साथ जमकर मारपीट कर दी। इस घटना में पीड़ित कर्मचारी को चोटें आई हैं।
गंभीर बात यह है कि दिन-रात शहर को साफ रखने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स की सुरक्षा पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया। जैसे ही इस घटना की खबर नगर पालिका के अन्य सफाई कर्मचारियों को हुई, उनमें रोष की लहर दौड़ गई।
कोतवाली के घेराव से थमी शहर की रफ्तार
सहकर्मी के साथ हुई हिंसा से नाराज़ सैकड़ों सफाई कर्मचारी एकजुट हुए और उन्होंने उरई कोतवाली का रुख किया। कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए कोतवाली के ठीक बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध दर्ज कराने के लिए उन्होंने कचरा उठाने वाली गाड़ियों को सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर दिया। देखते ही देखते कोतवाली मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और पूरी यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
प्रदर्शनकारी कर्मचारी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। कर्मचारियों का कहना था कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक वे अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे और न ही शहर में सफाई कार्य बहाल होगा।
पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और एफआईआर दर्ज
कोतवाली के बाहर भारी हंगामा और चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस के आला अधिकारियों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आक्रोशित सफाई कर्मचारियों से सीधे बातचीत की और उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।
पीड़ित सफाईकर्मी संतोष कुमार ने अपनी बाइट (बयान) में बताया: “मैं सुबह अपनी ड्यूटी कर रहा था, तभी कुछ लोगों ने बिना किसी वजह के मेरे साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। जब मैंने विरोध किया, तो उन्होंने मुझे लात-घूंसों से पीटा। हम दिन-रात शहर की सेवा करते हैं, अगर हमारे साथ ऐसा व्यवहार होगा तो हम कैसे काम करेंगे? हमें सुरक्षा और न्याय चाहिए।”
पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित की शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया और कर्मचारियों को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया। पुलिस ने बिना देर किए पीड़ित संतोष कुमार की तहरीर पर नामजद व अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद समाप्त हुआ गतिरोध
पुलिस द्वारा तत्काल एफआईआर दर्ज किए जाने और आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के ठोस आश्वासन के बाद सफाई कर्मचारियों का गुस्सा शांत हुआ। कर्मचारियों ने पुलिस प्रशासन के रुख पर संतोष व्यक्त करते हुए अपने प्रदर्शन को वापस लेने का ऐलान किया।
इसके बाद, सड़क पर खड़ी की गई कूड़ा गाड़ियों को एक-एक कर हटाया गया, जिसके बाद करीब घंटों से बाधित उरई कोतवाली मार्ग पर यातायात व्यवस्था को पुनः सुचारू रूप से संचालित कराया जा सका। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें रवाना कर दी हैं और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि शहर की शांति व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






