जालौन में खाकी और खादी की साठगांठ! तालाब की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप, जांच करने पहुंचे अधिकारी पर शिकायतकर्ता को धमकाने का सनसनीखेज मामला

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के आटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इटौरा-बाबनी गांव में ग्राम प्रधान पर ग्राम समाज की बेशकीमती तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा करवाने का संगीन आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि जब इस मामले की जांच करने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय उल्टा शिकायतकर्ता को ही हड़का दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैसों के लेन-देन और फर्जी पट्टे का गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इटौरा-बाबनी गांव के ग्राम प्रधान ने अधिकारियों के साथ गहरी सांठगांठ कर रखी है। आरोप है कि प्रति व्यक्ति 20-20 हजार रुपये की रिश्वत लेकर तालाब की जमीन पर फर्जी पट्टे किए जा रहे हैं। इन अवैध पट्टों के आधार पर तालाब की बेशकीमती भूमि पर भारी मात्रा में मिट्टी डलवाई जा रही है और तेजी से पक्के निर्माण व कब्जे किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण के लिए बने प्राकृतिक तालाबों को इस तरह से खत्म किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
पैमाइश से कतराते नजर आए तहसीलदार और लेखपाल
जब इस अवैध कब्जे की शिकायत उच्च स्तर पर की गई, तो दबाव में आकर स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद तहसीलदार और लेखपाल की संयुक्त टीम पैमाइश करने और मामले की जांच करने के लिए इटौरा-बाबनी गांव पहुंची। लेकिन आरोप है कि मौके पर पहुंचने के बाद अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मामले में लीपापोती करनी शुरू कर दी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अधिकारियों ने न तो तालाब की ढंग से पैमाइश की और न ही मौके पर मौजूद अवैध कब्जे को हटाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया। जब शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की जिद की, तो जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने उल्टे शिकायतकर्ता को ही धमकाना और हड़काना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद से इटौरा-बाबनी गांव के ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो आम आदमी न्याय के लिए कहां गुहार लगाएगा? ग्राम प्रधान और प्रशासनिक अमले की इस कथित मिलीभगत के कारण सरकारी संपत्ति सरेआम लूटी जा रही है और विरोध करने वालों की आवाज को दबाया जा रहा है।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब देखना यहहोगा कि जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी ग्राम प्रधान और लीपापोती करने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ क्या और कब तक सख्त कार्रवाई करते हैं।






