गांधी चबूतरे पर गूंजा आरक्षण हटाओ आंदोलन, आंदोलनकारियों ने सरकार से की बड़ी मांग
उरई, जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के मुख्यालय उरई में रविवार को एक नए और चर्चा का विषय बने आंदोलन की शुरुआत हुई। शहर के ऐतिहासिक गांधी चबूतरा पर ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले एक दिवसीय अनशन का आयोजन किया गया। इस अनशन के माध्यम से आंदोलनकारियों ने देश और प्रदेश की व्यवस्था में जातिगत आरक्षण की व्यापक समीक्षा करने, शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों को निष्पक्ष बनाने तथा कानूनों के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए पुख्ता कानूनी सुधार किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। प्रदर्शन के उपरांत आंदोलनकारियों ने अपनी सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।
किसी वर्ग का विरोध नहीं, समान अधिकारों की है मांग
अनशन स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में यह बात रखी कि उनका यह विरोध प्रदर्शन किसी भी जाति, समुदाय या विशिष्ट वर्ग के खिलाफ नहीं है। आयोजकों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि यह पूरा आंदोलन देश में समान नागरिक अधिकार, योग्यता के आधार पर हर क्षेत्र में अवसर मिलने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा कानून के समान और निष्पक्ष अनुपालन की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। उनका उद्देश्य समाज में दूरियों को पाटना और सभी को समान मंच प्रदान करना है।
चरणबद्ध तरीके से नीतिगत बदलाव की उठी मांग
अनशन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब सरकार को जातिगत आरक्षण की नीति की नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए। आंदोलनकारियों का सुझाव है कि इसे चरणबद्ध रूप से समाप्त करने या इसमें समयबद्ध सुधार करने की दिशा में नीति बनाई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में अवसर तय करते समय केवल जाति को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके स्थान पर आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियों, व्यक्तिगत प्रतिभा और वास्तविक जरूरत को मुख्य पैमाना बनाया जाना चाहिए ताकि जरूरतमंद और योग्य युवाओं को न्याय मिल सके।
यूजीसी के नए नियमों और एससी-एसटी एक्ट पर भी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार और शिक्षा जगत से जुड़े नीतिगत मामलों पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। आंदोलनकारियों ने यूजीसी (University Grants Commission) के वर्ष 2026 में जारी नए नियमों एवं विनियमों की तत्काल पुनर्समीक्षा की मांग की। इसके साथ ही, एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के संदर्भ में कहा गया कि इस कानून के तहत निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि इसका किसी भी प्रकार का दुरुपयोग न हो सके।
सरकार से उच्चस्तरीय समिति गठित करने की अपील
शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आंदोलनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि वे उनके प्रतिनिधिमंडल को आधिकारिक वार्ता के लिए आमंत्रित करें। उन्होंने मांग की है कि इन गंभीर विषयों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए ताकि सार्थक चर्चा हो सके। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह अनशन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का माध्यम है और जब तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक यह आंदोलन पूरी तरह से संवैधानिक दायरे में जारी रहेगा।






