कालपी: प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही पर एसडीएम सख्त, निर्माणाधीन 36 आवासों का किया औचक निरीक्षण

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कालपी (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और जनहितकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए शासन के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारी धरातल पर उतर आए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को कालपी तहसील के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मनोज कुमार सिंह और नायब तहसीलदार मुकेश कुमार ने नगर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत बन रहे आवासों का सघन निरीक्षण किया। इस औचक निरीक्षण से उन लाभार्थियों और संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया, जो निर्माण कार्य में शिथिलता बरत रहे थे।
विभिन्न मोहल्लों में स्थलीय सत्यापन
प्रशासनिक अमला दोपहर के समय कालपी नगर के विभिन्न वार्डों में पहुँचा। एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने सदर लेखपाल जितेंद्र सिंह के साथ तरननगंज, आलमपुर और तरीबुल्दा सहित कई मोहल्लों का दौरा किया। अधिकारियों ने एक-एक कर लगभग 36 आवासों की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ लाभार्थियों ने कार्य को तीव्रता से पूरा कर लिया है और उनके आवास अंतिम चरण में हैं। हालांकि, कई स्थानों पर निर्माण कार्य अभी भी अधूरा या शुरुआती स्तर पर पाया गया, जिस पर उपजिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
किस्त के दुरुपयोग पर सख्त रुख
निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने लाभार्थियों से सीधा संवाद किया और निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जिन लाभार्थियों को प्रथम किस्त की धनराशि प्राप्त हो चुकी है, वे उसका शत-प्रतिशत उपयोग केवल और केवल आवास निर्माण में ही करें।
एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने कहा, “शासन की मंशा हर गरीब को छत मुहैया कराना है। यदि किसी भी लाभार्थी ने सरकारी धन का उपयोग किसी अन्य कार्य में किया या निर्माण कार्य को बीच में ही रोक दिया, तो इसे सरकारी धन का गबन माना जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ न केवल रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी, बल्कि कड़ी कानूनी कार्रवाई (FIR) भी सुनिश्चित की जाएगी।”
बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर प्रहार
अधिकारियों ने लाभार्थियों को जागरूक करते हुए एक महत्वपूर्ण सलाह दी। एसडीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना पूरी तरह से पारदर्शी है और इसकी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है। उन्होंने आगाह किया कि योजना के नाम पर किसी भी बिचौलिए, दलाल या कर्मचारी को एक भी रुपया देने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई व्यक्ति आवास की अगली किस्त जारी कराने के नाम पर सुविधा शुल्क मांगता है, तो तत्काल इसकी सूचना तहसील प्रशासन को दें।
समयबद्धता और गुणवत्ता पर जोर
नायब तहसीलदार मुकेश कुमार ने लाभार्थियों को निर्देश दिया कि वे निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखें और मानक के अनुरूप ही सामग्री का प्रयोग करें। अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) और निर्माण की फोटो पोर्टल पर अपलोड होगी, वैसे ही दूसरी किस्त की धनराशि लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
इस निरीक्षण अभियान से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासन अब योजनाओं के केवल कागजी दावों पर निर्भर नहीं है, बल्कि भौतिक सत्यापन के जरिए भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार कर रहा है। सदर लेखपाल जितेंद्र सिंह को निर्देशित किया गया है कि वे नियमित अंतराल पर इन आवासों की प्रगति रिपोर्ट तहसील मुख्यालय को प्रेषित करते रहें ताकि समय पर लक्ष्य पूरा किया जा सके।






