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जालौन: जिला कारागार में DM-SP का औचक छापा; सुरक्षा चक्र और व्यवस्थाओं की हुई गहन पड़ताल

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार जालौन जिला कारागार के भीतर बैरकों और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

उरई, जालौन: जनपद में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जेल मैनुअल के शत-प्रतिशत अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने संयुक्त रूप से जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। इस औचक कार्रवाई से जेल परिसर में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर बंदियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं तक का बारीकी से निरीक्षण किया।

​सुरक्षा अभेद्य रखने के निर्देश, बैरकों की हुई सघन तलाशी

​निरीक्षण की शुरुआत मुख्य द्वार और सुरक्षा चौकियों की जांच से हुई। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने स्वयं जेल की बैरकों में जाकर सघन तलाशी अभियान का नेतृत्व किया। सुरक्षा कर्मियों ने बैरकों के कोने-कोने को खंगाला ताकि किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित सामग्री के प्रवेश की संभावना को समाप्त किया जा सके। हालांकि, तलाशी के दौरान कोई भी आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई, जिस पर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया।

​पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने जेल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की शिथिलता अक्षम्य होगी। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, उनकी रिकॉर्डिंग क्षमता और वॉच टावर पर तैनात कर्मियों की सतर्कता की जांच की। उन्होंने कहा कि “जेल की सुरक्षा न केवल परिसर के लिए बल्कि पूरे जनपद की शांति व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।”

​रसोईघर और भोजन की गुणवत्ता का परीक्षण

​प्रशासनिक टीम ने बंदियों के रहन-सहन और उनके खान-पान की व्यवस्था का भी जायजा लिया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने स्वयं रसोईघर (मेस) का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां बन रहे भोजन की शुद्धता, मसालों की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों की जांच की। जिलाधिकारी ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि बंदियों को निर्धारित डाइट चार्ट के अनुसार ही पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि रसोई में स्वच्छता बनाए रखना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

​स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा व्यवस्था पर जोर

​जेल में निरुद्ध बंदियों के मानवाधिकारों और उनके स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए जिलाधिकारी ने जेल अस्पताल का भी भ्रमण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि बीमार बंदियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए और यदि किसी बंदी को उच्च स्तरीय चिकित्सा की आवश्यकता हो, तो उसे तत्काल संबंधित अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया में देरी न की जाए। दवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा उपकरणों की कार्यशीलता को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए।

​अभिलेखों का सत्यापन और भविष्य की रणनीति

​निरीक्षण के अंतिम चरण में अधिकारियों ने कार्यालय के महत्वपूर्ण अभिलेखों, बंदी रजिस्टर और मुलाकाती रजिस्टर का सूक्ष्म परीक्षण किया। पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा कर्मियों के ड्यूटी रजिस्टर को अद्यतन (Update) रखने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए।

​इस अवसर पर जेल अधीक्षक नीरज देव सहित अन्य वरिष्ठ जेल अधिकारी और भारी पुलिस बल मौजूद रहा। जिलाधिकारी ने अंत में सख्त लहजे में कहा कि जेल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर संबंधित कर्मियों के विरुद्ध भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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