जालौन में प्रशासनिक संवेदनशीलता: टीकर गांव के अग्नि पीड़ितों को 24 घंटे के भीतर मिली ₹1,20,000 की तत्काल सहायता

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से प्रशासनिक मुस्तैदी और संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने डकोर विकासखंड के टीकर गांव में हुए भीषण अग्निकांड के पीड़ितों को मात्र 24 घंटे के भीतर राहत राशि और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी है। अज्ञात कारणों से लगी इस आग में दो गरीब परिवारों के आशियाने जलकर राख हो गए थे, जिसके बाद प्रशासन ने बिना किसी देरी के मौके पर पहुँचकर पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाने का काम किया।
अज्ञात कारणों से भड़की आग, दो घर हुए खाक

प्राप्त विवरण के अनुसार, डकोर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम टीकर में बीते दिन अचानक अज्ञात कारणों से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और गांव के दो स्थानीय निवासी कमलेश (पत्नी पुनु) और कस्तूरी (पत्नी शिवकुमार) के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक ग्रामीण और दमकल कर्मी आग पर काबू पाते, तब तक दोनों परिवारों की गृहस्थी, अनाज और दैनिक उपयोग का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया। इस अचानक आई विपदा से दोनों ही परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए और उनका रो-रोकर बुरा हाल था।
उप जिलाधिकारी ज्योति सिंह ने संभाला मोर्चा, मौके पर की त्वरित समीक्षा
घटना की सूचना मिलते ही उरई की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ज्योति सिंह ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री के उस स्पष्ट निर्देश के तहत, जिसमें दैवीय आपदा के शिकार लोगों को अविलंब राहत पहुँचाने की बात कही गई है, एसडीएम तत्काल राजस्व टीम के साथ टीकर गांव पहुँचीं। उन्होंने न केवल घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, बल्कि दोनों प्रभावित महिलाओं, कमलेश और कस्तूरी से सीधे मुलाकात की। एसडीएम ने उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में सरकार और प्रशासन पूरी तरह उनके साथ खड़ा है।
₹1.20 लाख की आर्थिक मदद और तत्काल खाद्य किट का वितरण
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देते हुए उप जिलाधिकारी ने मौके पर ही दोनों पीड़ित परिवारों को ₹1,20,000 (एक लाख बीस हजार रुपये) की स्वीकृत आर्थिक सहायता राशि के दस्तावेज और चेक सौंपे। यह त्वरित वित्तीय मदद प्रभावितों को अपने जीवन को पुनः पटरी पर लाने में संबल प्रदान करेगी। इसके साथ ही, परिवारों के सामने तात्कालिक रूप से भोजन का संकट न खड़ा हो, इसके लिए प्रशासन द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई दैनिक उपयोग की ‘खाद्य सामग्री किट’ भी उपलब्ध कराई गई, जिसमें राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं।
“प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों के साथ खड़ा है”
इस मौके पर उपस्थित अधिकारियों और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उप जिलाधिकारी ज्योति सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं कि आपदा की स्थिति में किसी भी नागरिक को बेसहारा न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा:
”शासन स्तर से अनुमन्य सभी सहायता प्रभावितों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही है। जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को सरकारी सहायता के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि प्रशासन खुद उनके द्वार तक पहुँचे।”
एसडीएम ने मौके पर मौजूद राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों को कड़ी हिदायत दी कि क्षेत्र में आपदा प्रबंधन को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें और यदि कहीं भी ऐसी घटना होती है, तो बिना समय गंवाए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित करें ताकि राहत कार्य में एक घंटे का भी विलंब न हो। प्रशासन की इस त्वरित कार्यप्रणाली की टीकर गांव सहित पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।






