जालौन: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, घर में घुसकर तोड़फोड़ और दबाव में समझौता कराने का आरोप

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में खाकी की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगम्मनपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। संपत्ति विवाद के एक मामले में पुलिस पर न केवल पक्षपात करने, बल्कि घर में घुसकर तोड़फोड़ करने और पीड़ितों पर दबाव बनाकर जबरन समझौता कराने का आरोप लगा है।
न्यायालय में लंबित है मामला, फिर भी पुलिस बनी ‘न्यायाधीश’
पीड़ित राजकुमार और शिवशंकर ने पुलिस अधीक्षक (SP) जालौन, विनय कुमार सिंह को दिए गए शिकायती पत्र में विस्तार से आपबीती दर्ज कराई है। पीड़ितों का कहना है कि उनकी पैतृक संपत्ति को लेकर माधौगढ़ न्यायालय में वाद संख्या 23/2025 विचाराधीन है। कानून के अनुसार, जब कोई मामला न्यायालय के समक्ष लंबित होता है, तो पुलिस का उसमें हस्तक्षेप करना अनुचित है। इसके बावजूद, पुलिस ने कथित तौर पर कानून को अपने हाथ में लेते हुए एक पक्ष के प्रभाव में आकर काम करना शुरू कर दिया।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
आरोप है कि बीते 11 जुलाई को रामपुरा थाने की पुलिस भारी बल के साथ जगम्मनपुर स्थित पीड़ितों के आवास पर पहुंची। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बिना किसी वैधानिक आदेश के उनके घर में जबरन प्रवेश किया। इस दौरान घर में जमकर तोड़फोड़ की गई और परिवार के सदस्यों के साथ अभद्रता की गई। इसके बाद, परिजनों को डरा-धमकाकर थाने ले जाया गया, जहाँ उनसे एक सादे कागज पर हस्तलिखित समझौता लिखवाया गया और जबरन हस्ताक्षर कराए गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पीड़ित राजकुमार कैमरे के सामने पूरी आपबीती बयां करते हुए रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। पीड़ितों का दावा है कि उनके पास उस दिन की तमाम साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में 11 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज, थाने की जनरल डायरी (GD), ड्यूटी रजिस्टर, पुलिस वाहन की लॉगबुक और संबंधित पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल (CDR) को सुरक्षित रखने की मांग की है।
निष्पक्ष जांच की मांग और प्रशासन की भूमिका
राजकुमार का कहना है कि उन्हें पुलिस प्रशासन से न्याय की उम्मीद है, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत डीआईजी झांसी, डीजीपी उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी जालौन से भी की है। पीड़ितों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जब तक जांच पूरी न हो जाए, तब तक मामले में शामिल संबंधित पुलिसकर्मियों को थाना क्षेत्र से हटा दिया जाए ताकि वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें।
पीड़ित राजकुमार की बाइट: “पुलिस का काम न्याय करना है, लेकिन यहाँ पुलिस ने स्वयं अपराधी की भूमिका निभाई। मेरे घर में तोड़फोड़ की गई, परिवार को थाने में बिठाकर डराया गया और जबरन समझौते पर दस्तखत कराए गए। हम जिलाधिकारी और एसपी साहब से न्याय की मांग कर रहे हैं, वरना हमें और बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
फिलहाल, इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।






