जालौन: प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में ‘खेल’, पक्के मकान मालिकों के नाम शामिल; ग्रामीणों ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। जनपद के ग्राम गायर से सामने आए एक मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आवास पात्रता सूची में व्यापक स्तर पर धांधली की गई है, जिसके चलते वास्तविक हकदार दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि साधन-संपन्न लोगों को सरकारी लाभ पहुंचाया जा रहा है।
अपात्रों का बोलबाला, गरीबों की अनदेखी
मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्राम गायर के निवासी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को एक शिकायती पत्र सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि पात्रता सूची तैयार करने में ग्राम सचिव द्वारा भारी अनियमितताएं बरती गई हैं।
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि सूची में ऐसे लोगों का चयन किया गया है, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान, ट्रैक्टर और अन्य व्यावसायिक संसाधन मौजूद हैं। आर्थिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद इनका नाम सूची में शामिल होना, जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। वहीं, जो परिवार आज भी पन्नी और फूस के मकानों में रहने को विवश हैं, उनके नाम सूची से गायब हैं।
खंड विकास अधिकारी पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने यह भी खुलासा किया कि इस अनियमितता की शिकायत उन्होंने पूर्व में खंड विकास अधिकारी (BDO) से भी की थी, लेकिन वहां से उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन मिले। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी भी प्रकार की जांच न होने से दोषियों के हौसले बुलंद हैं और प्रशासनिक उदासीनता के कारण गरीब परिवारों के साथ अन्याय का सिलसिला जारी है।
क्या कहना है ग्रामीणों का?
इस पूरे मामले पर अपनी पीड़ा साझा करते हुए ग्रामीण महिला गीता देवी ने कहा, “हम लोग बरसात में टूटे घरों में रहने को मजबूर हैं, लेकिन सूची में हमारा नाम कहीं नहीं है। संपन्न लोग जो पहले से ही पक्के घरों में रह रहे हैं, उन्हें ही फिर से आवास का लाभ दिया जा रहा है, यह सरासर अन्याय है।”
वहीं, ग्रामीण धनीराम ने आरोप लगाया कि पात्रता का पैमाना पूरी तरह से बदल दिया गया है। उन्होंने कहा, “बिना जांच-पड़ताल के ही मनमानी सूची तैयार की गई है। हमने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।”
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वर्तमान आवास सूची को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दोबारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और ग्राम सचिव की भूमिका की जांच करने की भी मांग की है ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या रुख अपनाता है और कब तक वास्तविक जरूरतमंदों को न्याय मिल पाता है।






