जालौन में खाकी शर्मसार: उरई की गल्ला मंडी चौकी इंचार्ज का पैर पर पैर चढ़ाकर महिलाओं को धमकाने का वीडियो वायरल, उठे गंभीर सवाल

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उरई की गल्ला मंडी पुलिस चौकी में कुर्सी पर बैठकर मेज (टेबल) पर पैर रखे हुए चौकी इंचार्ज अमित चतुर्वेदी, और सामने अपनी शिकायत लेकर खड़ी असहाय फरियादी महिलाएं

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन : उत्तर प्रदेश की मित्र पुलिस एक बार फिर अपने संवेदनहीन और अमानवीय रवैये को लेकर कटघरे में है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जहां एक तरफ महिला सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर कड़े निर्देश जारी करते रहते हैं, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ पुलिसकर्मी उनके इन दावों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला जालौन जिले के उरई से सामने आया है, जिसने खाकी की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। न्याय की आस में पुलिस चौकी पहुंचीं पीड़ित महिलाओं को इंसाफ मिलना तो दूर, वहां तैनात जिम्मेदार दरोगा की बदसलूकी और धमकियों का सामना करना पड़ा।

मेज पर पैर और जुबान पर तल्खी: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

​यह पूरा मामला उरई की गल्ला मंडी पुलिस चौकी का है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने पुलिस महकमे के भीतर हड़कंप मचा दिया है। वायरल वीडियो में गल्ला मंडी चौकी इंचार्ज अमित चतुर्वेदी साफ तौर पर अपनी सरकारी कुर्सी पर बेहद गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में बैठे नजर आ रहे हैं। दरोगा जी के पैर सामने रखी मेज (टेबल) पर पसरे हुए हैं, जो उनकी दबंगई और पद के अहंकार को साफ दर्शाता है। वहीं, दूसरी ओर अपनी फरियाद लेकर आईं कुछ असहाय महिलाएं उनके सामने खड़ी होकर न्याय की गुहार लगा रही हैं। मर्यादा और अनुशासन को ताक पर रखकर बैठे चौकी इंचार्ज का यह वीडियो अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

मारपीट की शिकायत लेकर पहुंची थीं पीड़ित महिलाएं

​जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिलाएं किसी आपसी मारपीट के मामले में न्याय की उम्मीद लेकर गल्ला मंडी चौकी पहुंची थीं। पीड़ितों का आरोप है कि अमूमन रक्षक की भूमिका में दिखने वाली पुलिस का रूप यहां बिल्कुल जुदा था। चौकी इंचार्ज अमित चतुर्वेदी ने उनकी आपबीती सुनने और मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय, उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप तो यहां तक हैं कि दरोगा ने न्याय मांगने आईं इन महिलाओं को डराया-धमकाया और वहां से भगा दिया। जब पीड़ितों ने अपनी बात रखनी चाही, तो सत्ता और वर्दी के मद में चूर दरोगा ने उनकी एक न सुनी।

व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल: न्याय का केंद्र या खौफ का ठिकाना?

​इस वीडियो के सामने आने के बाद न केवल आम जनता में भारी आक्रोश है, बल्कि पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को भी जवाब देते नहीं बन रहा है। इस घटना ने कई गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • ​क्या न्याय की आस में थानों और चौकियों के चक्कर काटने वाले फरियादियों के साथ इसी तरह का अपमानजनक व्यवहार किया जाएगा?
  • ​क्या उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘मित्र पुलिस’ वाली छवि सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित है?
  • ​क्या पुलिस चौकियां अब आम जनता के लिए न्याय का केंद्र न रहकर खौफ और प्रताड़ना का ठिकाना बनती जा रही हैं?
  • ​मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बावजूद जमीनी स्तर पर महिलाओं के प्रति ऐसा संवेदनहीन रवैया कब तक बर्दाश्त किया जाएगा?

कार्रवाई के आश्वासन पर टिकी जनता की नजरें

​वीडियो के व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद जालौन पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी बैकफुट पर हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लिया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि, स्थानीय जनता और प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों को जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। अब देखना यह होगा कि ऑन-ड्यूटी इस तरह की दबंगई और अनुशासनहीनता दिखाने वाले दरोगा अमित चतुर्वेदी पर पुलिस अधीक्षक कोई सख्त और दंडात्मक कदम उठाते हैं, या फिर यह मामला भी महकमे की अंदरूनी लीपापोती का शिकार होकर रह जाएगा।

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