प्रशासनिक सख्ती: कालपी एसडीएम ने राजस्व कार्यों में ढिलाई पर लेखपालों को दी कड़ी चेतावनी; फार्मर रजिस्ट्री में देरी पर जताई नाराजगी

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जालौन की कालपी तहसील में उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राजस्व कर्मियों और लेखपालों की समीक्षा बैठक का दृश्य

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कालपी (जालौन):उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व कार्यों को गति देने और जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु प्रशासनिक मशीनरी अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। इसी क्रम में मंगलवार को जालौन जिले की कालपी तहसील के सभागार में लेखपालों की एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी (SDM) मनोज कुमार सिंह ने की। बैठक के दौरान राजस्व कार्यों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों और लेखपालों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि कार्य में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राजस्व कार्यों की बिंदुवार समीक्षा और कड़े निर्देश

​बैठक को संबोधित करते हुए उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि राजस्व विभाग शासन और जनता के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनगणना, फार्मर रजिस्ट्री और खतौनी की कंप्यूटर फीडिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक लेखपाल को अपनी बीट के कार्यों की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। उन्होंने शत-प्रतिशत परिणाम सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर गैर-जिम्मेदाराना रवैया पाया गया, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

फार्मर रजिस्ट्री में देरी पर तहसीलदार का कड़ा रुख

​बैठक के दौरान तहसीलदार अभिनव तिवारी ने फार्मर रजिस्ट्री के कार्य की वर्तमान स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। समीक्षा में पाया गया कि कुछ लेखपालों के क्षेत्रों में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पिछले कई महीनों से लंबित पड़ा है। तहसीलदार ने कड़े शब्दों में कहा कि किसानों से जुड़ी योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर इन दस्तावेजों पर निर्भर करता है, ऐसे में इस कार्य को लंबित रखना शासन के आदेशों की अवहेलना है। उन्होंने सभी लेखपालों को निर्देशित किया कि लंबित पड़े कार्यों को तत्काल प्रभाव से पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता पर जोर

​एसडीएम ने बैठक में तकनीक के उपयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि खतौनी की कंप्यूटर फीडिंग का कार्य केवल एक विभागीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेखपालों को निर्देश दिए गए कि वे डिजिटल डेटा को त्रुटिहीन रखें ताकि भविष्य में किसानों और आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी और राजस्व कर्मी

​इस समीक्षा बैठक में प्रशासनिक अमले के साथ-साथ भारी संख्या में राजस्व कर्मी मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से नायब तहसीलदार चंद्र मोहन शुक्ला, राजस्व निरीक्षक कुंवर हरेंद्र सिंह, प्रमोद द्विवेदी, सुरेश और राजेंद्र मौजूद रहे।

​साथ ही, क्षेत्रीय कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले लेखपालों में सदर लेखपाल जितेंद्र सिंह यादव, अभिषेक यादव, जितेंद्र राजपूत, विभा पल्लवी श्रीवास्तव, प्रिया सिंह चौहान, राहुल कुमार, प्रशांत गौतम, छविनाथ सिंह पाल, जयपाल सिंह, विद्यासागर और जितेंद्र वर्मा सहित अन्य कर्मियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों के अक्षरशः पालन का संकल्प लिया।

निष्कर्ष:

प्रशासन की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि कालपी तहसील में अब सरकारी कार्यों की लेटलतीफी का दौर समाप्त होने वाला है। एसडीएम और तहसीलदार की इस संयुक्त घेराबंदी ने राजस्व कर्मियों के बीच स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कार्यक्षमता ही उनके मूल्यांकन का मुख्य आधार होगी।

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