शासन की मंशा तार-तार करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज: कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में बोले जालौन डीएम राजेश कुमार पाण्डेय

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कलेक्ट्रेट जालौन के जनसुनवाई कक्ष में बैठे जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, जो अत्यंत गंभीरता से एक बुजुर्ग फरियादी की शिकायत सुन रहे हैं और पास ही में अन्य प्रशासनिक अधिकारी व शिकायतकर्ता उपस्थित हैं।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन : उत्तर प्रदेश शासन की मंशानुसार आमजन की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान के उद्देश्य से मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जनसुनवाई कक्ष में एक महत्वपूर्ण जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वयं जालौन के जिलाधिकारी (डीएम) राजेश कुमार पाण्डेय ने की। जिलाधिकारी ने जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों फरियादियों की शिकायतों को अत्यंत गंभीरता, संवेदनशीलता और धैर्य के साथ सुना। उन्होंने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को कड़े लहजे में चेतावनी दी कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों का लगा अंबार

​जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न तहसीलों, ब्लॉकों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं को जिलाधिकारी के समक्ष रखा। इस दौरान कलेक्ट्रेट कक्ष में मुख्य रूप से निम्नलिखित विभागों से संबंधित शिकायतों का अंबार देखा गया:

  • राजस्व एवं भूमि विवाद: अवैध कब्जा, पैमाइश में देरी और चकरोड की पैमाइश न होना।
  • अतिक्रमण: सार्वजनिक एवं सरकारी जमीनों पर दबंगों द्वारा किया गया अवैध अतिक्रमण।
  • पुलिस प्रशासन: थानों में सुनवाई न होने और मामलों की निष्पक्ष जांच न किए जाने की शिकायतें।
  • विद्युत विभाग: अत्यधिक बिजली बिल, ट्रांसफार्मर का न बदला जाना और अघोषित कटौती।
  • कल्याणकारी योजनाएं: वृद्धावस्था, दिव्यांग व विधवा पेंशन, राशन कार्ड में नाम जुड़वाने और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित रहने से जुड़े मामले।

​प्रत्येक फरियादी की बात को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

केवल कागजी औपचारिकता नहीं, स्थलीय जांच के आधार पर होगा निस्तारण

​जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने जनसुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में जनसमस्याओं का समाधान सबसे ऊपर है। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिया:

​”शिकायतों के निस्तारण में केवल कागजी खानापूर्ति या औपचारिकता न बरती जाए। प्रत्येक प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए जिम्मेदार अधिकारी स्वयं मौके पर जाएं, स्थलीय निरीक्षण करें, वास्तविक स्थिति का आकलन करें और तथ्यों के आधार पर न्यायसंगत व उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

​उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत आख्या लगाने वाले या भ्रामक रिपोर्ट सौंपने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

निर्धारित समय-सीमा और नियमित संवाद पर जोर

​प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को समय-सीमा (Timeline) के भीतर काम करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि हर शिकायत के समाधान की एक निश्चित अवधि होती है, जिसका उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

​इसके साथ ही उन्होंने एक अभिनव निर्देश देते हुए कहा कि निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान अधिकारी शिकायतकर्ताओं के साथ निरंतर और नियमित संवाद बनाए रखें। इससे फरियादियों को अपनी शिकायत की वास्तविक प्रगति (Status) की जानकारी मिलती रहेगी, जिससे जनता का जिला प्रशासन और सरकारी व्यवस्था के प्रति विश्वास सुदृढ़ होगा।

लापरवाही बरतने वालों को डीएम की सीधी चेतावनी

​जिलाधिकारी ने जनसुनवाई को प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब, उदासीनता या टालमटोल की प्रवृत्ति पाई गई, तो संबंधित अधिकारी का उत्तरदायित्व तय करते हुए उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर सेवा संबंधी कार्रवाई की जाएगी।

​इस उच्च स्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के मुख्य विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी पुलिस, जिला पूर्ति अधिकारी और विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता सहित अन्य आला प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्ट्रेट प्रशासन द्वारा अंत में सभी फरियादियों को आश्वस्त किया गया कि उनकी हर समस्या का पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

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