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रामपुरा: सरस्वती ज्ञान मंदिर में छात्र प्रताड़ना के आरोपों पर झांसी से आई टीम ने की छापेमारी; जांच के घेरे में विद्यालय प्रबंधन

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रामपुरा के सरस्वती ज्ञान मंदिर में जांच के लिए पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारी और विद्यालय परिसर का दृश्य।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

रामपुरा (जालौन): जनपद के रामपुरा नगर स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर में एक छात्र के साथ कथित तौर पर हुई मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। निनावली जागीर निवासी नरेश पुत्र विजय शंकर द्वारा उच्चाधिकारियों से की गई लिखित शिकायत के बाद, शिक्षा विभाग ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है। मंगलवार को झांसी से आए उच्चाधिकारियों की टीम ने विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया, जिससे शिक्षण संस्थान में हड़कंप मच गया।

शिक्षा विभाग की टीम का औचक निरीक्षण

​शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एडी बेसिक (झांसी मंडल) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) चंद्र प्रकाश निषाद की संयुक्त टीम रामपुरा पहुंची। टीम ने विद्यालय के अभिलेखों, उपस्थिति पंजिका और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की घंटों तक गहन जांच की। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान टीम को कई तकनीकी खामियां और विभागीय मानकों की अनदेखी देखने को मिली। अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया स्वीकार किया कि विद्यालय और शिक्षकों द्वारा निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पूर्णतः पालन नहीं किया जा रहा है।

अधिकारियों की चुप्पी ने खड़े किए सवाल

​हैरानी की बात यह रही कि जांच के बाद जब मीडियाकर्मियों ने एडी बेसिक और बीएसए से जांच के निष्कर्षों पर बात करने की कोशिश की, तो अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। जांच टीम की यह ‘कतराने’ वाली मुद्रा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच निष्पक्ष होगी या किसी दबाव में रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

​शिकायतकर्ता नरेश का आरोप है कि विद्यालय के संचालक संदीप यादव और शिक्षक महिपाल सिंह व हकीम सिंह ने छात्र जीत वरूल के साथ अमानवीय व्यवहार किया और उसे प्रताड़ित किया। शिकायत में शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं, दूसरी ओर छात्र के परिजन मनिंद्र महाराज का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन अपनी प्रशासनिक और शैक्षणिक कमियों को छिपाने के लिए अब पीड़ित परिवार पर ही झूठे आरोप मढ़ रहा है। उनका स्पष्ट कहना है कि “पढ़ाई की आड़ में बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।”

विद्यालय संचालक का पक्ष: “फीस विवाद के चलते रची गई साजिश”

​इधर, विद्यालय के संचालक संदीप यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि यह पूरा मामला प्रताड़ना का नहीं, बल्कि फीस जमा न करने का है। संचालक के अनुसार, सत्र 2025-26 में मनिंद्र महाराज ने तीन बच्चों—दिव्यांशी, देव नारायण योगी रत्न (कक्षा 1) और जीत वरूल (कक्षा 9)—का प्रवेश कराया था। यादव का आरोप है कि पूरे सत्र के दौरान एक भी बार फीस जमा नहीं की गई। जब प्रबंधन ने मौखिक और लिखित रूप से फीस की मांग की, तो अभिभावकों ने कथित तौर पर अपनी “ऊंची पहुंच” का धौंस दिखाते हुए भुगतान से इनकार कर दिया और दबाव बनाने के लिए यह झूठी शिकायत दर्ज कराई।

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RAHUL

Rahul (रिपोर्टर,जालौन) जालौन जनपद में स्थानीय समाचारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं।

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