जालौन: कोंच में हार्वेस्टर की चिंगारी ने बरपाया कहर, दो बीघा गेहूं की फसल जलकर राख; किसान दाने-दाने को मोहताज

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जालौन के कोंच में गेहूं के खेत में लगी भीषण आग और उठती लपटों को बुझाने का प्रयास करते ग्रामीण और दमकल कर्मी

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कोंच (जालौन)। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के अंतर्गत आने वाले कोंच कोतवाली क्षेत्र में बुधवार का दिन एक किसान के लिए खुशियों की जगह बर्बादी की खबर लेकर आया। क्षेत्र के बदनपुरा मौजे में गेहूं की कटाई के दौरान हार्वेस्टर मशीन में हुए शॉर्ट सर्किट ने ऐसी भीषण आग लगाई कि देखते ही देखते किसान की साल भर की मेहनत धुएं में तब्दील हो गई। इस अग्निकांड में करीब दो बीघा गेहूं की खड़ी फसल पूरी तरह जलकर खाक हो गई है।

हार्वेस्टर से निकली चिंगारी बनी काल

​जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे की है। बाबू पैलेस के समीप स्थित बदनपुरा मौजे में 52 वर्षीय किसान कमलेश उर्फ पप्पू कुशवाहा के खेत में गेहूं की फसल की कटाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा था। किसान ने फसल जल्द समेटने के उद्देश्य से किराए पर हार्वेस्टर मशीन लगवाई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मशीन चलते समय अचानक उसमें से बिजली की तेज चिंगारी निकली। आशंका जताई जा रही है कि हार्वेस्टर के आंतरिक सिस्टम में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसकी एक छोटी सी चिंगारी सूखी और तैयार खड़ी गेहूं की फसल पर जा गिरी।

तेज हवाओं ने आग में डाला ‘घी’ का काम

​दोपहर के समय चल रही तेज पछुआ हवाओं के कारण आग ने पलक झपकते ही विकराल रूप धारण कर लिया। फसल पूरी तरह सूखी होने के कारण आग की लपटें चंद मिनटों में ही पूरे खेत में फैल गईं। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और आसमान में उठता काला धुआं देखकर आसपास के गांवों में हड़कंप मच गया। खेतों में काम कर रहे अन्य किसान और राहगीर तुरंत मौके की ओर दौड़े।

ग्रामीणों का साहस और फायर ब्रिगेड की मशक्कत

​आग की भयावहता को देखते हुए ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला। लोगों ने निजी संसाधनों, पानी के टैंकरों, बाल्टियों और खेतों की गीली मिट्टी का उपयोग कर आग पर काबू पाने की कोशिश की। ग्रामीण हरे पेड़ों की डालियों से आग को पीट-पीटकर बुझाने का प्रयास कर रहे थे ताकि लपटें पास के अन्य खेतों तक न पहुंचें।

​सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड प्रभारी लाखन सिंह के नेतृत्व में टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूर्णतः नियंत्रण पाया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से पास के अन्य किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलने से बच गई, अन्यथा यह हादसा एक बड़ी त्रासदी का रूप ले सकता था।

आर्थिक संकट में किसान, मुआवजे की गुहार

​इस भीषण अग्निकांड में पीड़ित किसान कमलेश कुशवाहा की करीब दो बीघा फसल जल गई है। स्थानीय अनुमान के अनुसार, जली हुई फसल की बाजार कीमत लगभग 50,000 रुपये बताई जा रही है। किसान के लिए यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि उसके परिवार के साल भर के भोजन का आधार था। घटना के बाद से ही किसान के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित ने प्रशासन से हाथ जोड़कर उचित मुआवजे की मांग की है ताकि वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके।

प्रशासनिक जांच और सर्वे शुरू

​घटना की सूचना पर प्रशासनिक अमला भी सक्रिय हो गया। एसडीएम ज्योति सिंह ने राजस्व विभाग की टीम को तुरंत मौके पर भेजकर नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दिए। राजस्व टीम ने खेत का मुआयना कर सर्वे रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर शासन के नियमानुसार पीड़ित किसान को हर संभव आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि, आग लगने के पुख्ता कारणों की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

​राहत की बात यह रही कि इस पूरे हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। हार्वेस्टर चालक, मजदूर और किसान सभी सुरक्षित हैं। फायर ब्रिगेड प्रभारी लाखन सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में सूखी फसल में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, ऐसे में सावधानी ही एकमात्र बचाव है।

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