मुख्य बाजार में हुए अपमान के 10 महीने बाद व्यवसायी ने कुएं में कूदकर दी जान, तीन पर मुकदमा दर्ज

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के अंतर्गत कोंच नगर में एक बेहद हृदयविदारक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के प्रतापनगर निवासी एक प्रतिष्ठित व्यवसायी मनोज कुमार हिंगवासिया ने सार्वजनिक रूप से हुए अपने अपमान और पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने से आहत होकर मौत को गले लगा लिया। शुक्रवार दोपहर कैलिया बाईपास स्थित एक बगीचे के कुएं में उनका शव मिलने से पूरे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त हो गया है। इस मामले में पुलिस ने मृतक के पुत्र की तहरीर पर तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला? उधारी माँगना पड़ा भारी
घटनाक्रम की जड़ें पिछले वर्ष की 19 जुलाई 2025 से जुड़ी हैं। मृतक मनोज कुमार के पुत्र प्रखर हिंगवासिया द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, उनके पिता मुखिया मार्केट स्थित अपनी इलेक्ट्रिकल और कन्फैक्शनरी की दुकान पर बैठे थे। शाम करीब 5 बजे मोहल्ले के ही शिवचरन अग्रवाल उर्फ राजा नमकीन, उनका पुत्र राहुल और पत्नी मीना दुकान पर आए। जब मनोज कुमार ने उनसे पुरानी उधारी के रुपयों की मांग की, तो आरोपियों ने न केवल पैसे देने से मना किया, बल्कि उनके साथ गाली-गलौज भी शुरू कर दी।
बीच बाजार चप्पलों से पिटाई और वायरल वीडियो
तहरीर में आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर तीनों आरोपियों ने मनोज कुमार को दुकान से घसीटकर सड़क पर पटक दिया और सरेराह चप्पलों से उनकी बेरहमी से पिटाई की। इस अपमानजनक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुआ था। मृतक के परिजनों का आरोप है कि उस समय पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन आरोपियों के रसूख के चलते कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की इसी निष्क्रियता ने आरोपियों के हौसले बुलंद कर दिए और वे लगातार मनोज कुमार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे।
दीवार पर लिखा दर्द: सुसाइड नोट में पुलिस और आरोपियों का जिक्र
7 मई 2026 की शाम 4 बजे मनोज कुमार घर से निकले और वापस नहीं लौटे। काफी तलाश के बाद शुक्रवार को उनका शव मंदिर के पास एक कुएं में मिला। घटनास्थल पर मंदिर की दीवार पर मनोज कुमार ने अपनी हस्तलिपि में एक सुसाइड नोट छोड़ा है। सुसाइड नोट के शब्द व्यवस्था और समाज पर गहरे सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने लिखा कि “पुलिस के सामने लात-जूतों से जो मारपीट की गई थी, उससे कुंठित होकर वह यह आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।” यह सुसाइड नोट स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह पिछले 10 महीनों से किस मानसिक प्रताड़ना और आत्मग्लानि से गुजर रहे थे।
ब्राह्मण महासभा के नेतृत्व में कोतवाली का घेराव
शनिवार को इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया। ब्राह्मण महासभा के मोनू पंडित, संतोष तिवारी, साकेत शांडिल्य और धर्मेंद्र बबेले सहित दर्जनों पदाधिकारियों और समाज के लोगों के साथ मृतक का पुत्र कोतवाली पहुँचा। भारी संख्या में जुटे लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। बढ़ते दबाव को देखते हुए पुलिस ने राजा नमकीन, उसके पुत्र और पत्नी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।
पुलिस का पक्ष और आगामी कार्रवाई
स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और रिपोर्ट तथा सुसाइड नोट के आधार पर विवेचना की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कानून अपना काम करेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है कि आखिर 10 महीने पहले हुई मारपीट की घटना पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी।
फिलहाल, कोंच में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। एक हंसते-खेलते परिवार का मुखिया अब इस दुनिया में नहीं है, और पीछे छोड़ गया है न्याय की बाट जोहते परिजन और व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष।






