जालौन के पहाड़गांव में गहराया पेयजल संकट: दो वर्षों से सूखी पड़ी है पाइपलाइन, 800 मीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण

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जालौन के पहाड़गांव में खाली बर्तन लेकर खड़ीं ग्रामीण महिलाएं और 800 मीटर दूर से पानी लाते बच्चे, जो जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन (उत्तर प्रदेश) : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पानी का हाहाकार मचा हुआ है। ताजा मामला जालौन की कोंच तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पहाड़गांव से सामने आया है, जहाँ के मातन मोहल्ले में पिछले दो वर्षों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधिकारी (डीएम) राजेश कुमार पांडेय से मुलाकात कर एक शिकायती पत्र सौंपा और पेयजल संकट से निजात दिलाने की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

भीषण गर्मी में 800 मीटर दूर से पानी लाने की मजबूरी

​जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में मातन मोहल्ले के दर्जनों परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि बैंक मार्ग से होकर आने वाली जल संस्थान की मुख्य पाइपलाइन पिछले दो सालों से सूखी पड़ी है। इस भीषण गर्मी में जब तापमान अपने चरम पर है, तब मोहल्ले के लोगों के पास पीने के पानी का कोई स्थानीय स्रोत नहीं बचा है।

​मोहल्ले में न तो कोई इंडिया मार्का हैंडपंप चालू हालत में है और न ही जल संस्थान की जलापूर्ति का कोई लाभ मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप, गाँव की महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को प्रतिदिन सुबह-शाम गाँव के बाहर, लगभग 800 मीटर दूर तालाब के किनारे लगे एकमात्र इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।

​”इस चिलचिलाती धूप में आधा किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलकर पानी लाना हमारी नियति बन चुका है। सबसे ज्यादा परेशानी हमारे घर की महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है, जिनका पूरा समय सिर्फ पानी का इंतजाम करने में बीत जाता है।”

चंदा, ग्रामीण महिला

जल शक्ति मिशन की खुली पोल: शोपीस बनीं पानी की टंकियां

​केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल शक्ति मिशन’ (हर घर जल योजना) का दावा है कि ग्रामीण इलाकों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाया जा रहा है। लेकिन पहाड़गांव के जमीनी हालात इन दावों की पोल खोल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जल शक्ति मिशन के तहत गाँव में नई पाइपलाइन बिछाई गई थी और पानी की टंकी का निर्माण भी कराया गया था, जिससे ग्रामीणों में स्वच्छ पानी मिलने की आस जगी थी।

​परंतु, विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते नवनिर्मित पानी की टंकी के दोनों मुख्य वाल्व (Valve) पिछले काफी समय से खराब पड़े हैं। वाल्व खराब होने के कारण टंकी से होने वाली नियमित जलापूर्ति पूरी तरह बंद है। वर्तमान में जल संस्थान द्वारा केवल ट्यूबवेलों के माध्यम से सीधे (Direct) सप्लाई दी जा रही है। डायरेक्ट सप्लाई का प्रेशर इतना कम है कि टेल (Tail) पर स्थित मातन मोहल्ले तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुँच पा रही है।

​”सरकार कागजों पर हर घर जल का दावा कर रही है, लेकिन यहाँ हकीकत कुछ और है। टंकी के वाल्व खराब हैं, अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। डायरेक्ट ट्यूबवेल सप्लाई से अंतिम छोर पर बसे मातन मोहल्ले में पानी चढ़ ही नहीं पाता।”

माताप्रसाद, स्थानीय ग्रामीण

प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

​मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी अब ग्रामीणों के समर्थन में उतर आए हैं। जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अमित सागर ने ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचकर जल संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की इस जायज समस्या को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन ढाक के तीन पात वाली स्थिति रही।

​”जल संस्थान के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण सैकड़ों लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। हमने जिलाधिकारी महोदय से मांग की है कि युद्धस्तर पर तकनीकी खामियों (खराब वाल्व) को ठीक कराया जाए और मोहल्ले में पानी की स्थायी व्यवस्था की जाए। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो हम ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।”

अमित सागर, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि

​इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को तत्काल मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी और खराब वाल्वों की मरम्मत कराकर जलापूर्ति को सुचारू रूप से बहाल किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन का यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है या ग्रामीणों को इस तपती गर्मी में ऐसे ही पानी के लिए कोस दूर भटकना पड़ेगा।

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