बघौरा-2 विद्यालय में डीएम की दस्तक, 19 पैरामीटर पर हुए कायाकल्प कार्यों का लिया जायजा
उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में प्रशासनिक कसावट और बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए जिला प्रशासन लगातार गंभीर नजर आ रहा है। इसी क्रम में जनपद के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने उरई स्थित कंपोजिट उच्च माध्यमिक विद्यालय बघौरा-2 का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और कक्षाओं में जाकर बच्चों से सीधे संवाद किया। डीएम के इस औचक निरीक्षण से शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों में हड़कंप मच गया, वहीं प्रशासनिक सक्रियता की हर तरफ सराहना हो रही है।
ऑपरेशन कायाकल्प से बदली स्कूलों की तस्वीर
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत विद्यालय में कराए गए विकास कार्यों की जमीनी हकीकत परखी। शासन की महत्वाकांक्षी योजना ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत इस विद्यालय में कुल 19 पैरामीटर पर कार्य कराए गए हैं, जिससे स्कूल की पूरी तस्वीर बदल चुकी है। डीएम ने सभी निर्माण कार्यों, कक्षाओं की स्थिति और परिसरों की साफ-सफाई का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का उद्देश्य बच्चों को बेहतर माहौल देना है।
कक्षा 4 और 6 के बच्चों की परखी शैक्षिक गुणवत्ता
विद्यालय पहुंचे जिलाधिकारी सीधे कक्षाओं के भीतर पहुंचे। उन्होंने कक्षा 4 और कक्षा 6 के छात्र-छात्राओं से संवाद स्थापित किया। बच्चों की प्रतिभा को परखने के लिए डीएम ने उनसे गणित के कुछ सवाल हल कराए और पहाड़े सुने। बच्चों ने भी आत्मविश्वास के साथ जिलाधिकारी के सवालों के सटीक जवाब दिए, जिसे देखकर डीएम काफी प्रसन्न नजर आए। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि बच्चों की पठन-पाठन की शैली को और अधिक रोचक बनाया जाए ताकि उनका बौद्धिक विकास तेजी से हो सके।
स्मार्ट क्लास और आधुनिक सुविधाओं से मिल रहा नया आयाम
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि विद्यालय में बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लासेस की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा सभी कक्षाओं में बेहतरीन टाइलीकरण का कार्य कराया गया है, जिससे classrooms का वातावरण पूरी तरह से बदल गया है। विद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सुविधामयी शौचालयों का निर्माण कराया गया है, जो समावेशी शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जिलाधिकारी ने शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए कि इन सभी आधुनिक सुविधाओं का रखरखाव सुचारू रूप से जारी रखा जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा बिना किसी बाधा के मिलती रहे।






