जालौन में शिक्षा की नई अलख: ‘स्कूल चलो अभियान’ का हुआ भव्य आगाज़, 14 हजार नामांकन का लक्ष्य

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन): जनपद जालौन में शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित बच्चों को स्कूल तक लाने के उद्देश्य से बुधवार को ‘स्कूल चलो अभियान’ का विधिवत और उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया। उरई मुख्यालय स्थित बघौरा के उच्च प्राथमिक कंपोजिट विद्यालय में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के.के. सिंह और अपर जिलाधिकारी (ADM) संजय कुमार के साथ मिलकर इस महत्वाकांक्षी अभियान की औपचारिक शुरुआत की।
नामांकन और उत्साह का संगम

कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय में नव प्रवेशित नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राओं को स्वयं अपने हाथों से किताबें और स्कूल बैग भेंट किए। उन्होंने न केवल बच्चों को शिक्षा के महत्व के प्रति प्रोत्साहित किया, बल्कि हरी झंडी दिखाकर ‘स्कूल चलो अभियान’ रैली को भी रवाना किया। बघौरा विद्यालय में पहले ही दिन 40 बच्चों का नामांकन किया गया, जिसे देखकर अभिभावकों और ग्रामीणों में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल दिखा।
14 हजार बच्चों को जोड़ने का महा-लक्ष्य
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि 1 अप्रैल 2026 से जालौन जनपद के सभी 1489 परिषदीय विद्यालयों में यह अभियान एक साथ संचालित कर दिया गया है। प्रशासन ने इस वर्ष के अभियान में कुल 14 हजार नए बच्चों के नामांकन का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनपद का कोई भी बच्चा शिक्षा की रोशनी से वंचित न रहे।
विशेष फोकस: 8 से 14 वर्ष की आयु वर्ग
प्रशासन ने उन बच्चों की पहचान करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई है जो वर्तमान में शिक्षा की परिधि से बाहर हैं। जिलाधिकारी ने बताया, “हमारा विशेष ध्यान 8 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के उन बच्चों पर है जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। साथ ही, 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक बालक-बालिका का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।”
घर-घर दस्तक और ड्रॉपआउट पर लगाम
अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) को सक्रिय कर दिया गया है। उन्हें घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने और ऐसे बच्चों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जो ड्रॉपआउट हो चुके हैं। इन बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष काउंसलिंग और रणनीति अपनाई जाएगी। यह अभियान 15 अप्रैल तक चलेगा और 30 अप्रैल को जिलाधिकारी स्वयं इसकी समीक्षा बैठक करेंगे।
साक्षरता दर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प
वर्तमान में जालौन जनपद की साक्षरता दर 81.6 प्रतिशत है। जिलाधिकारी ने इस आंकड़े को और बेहतर बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने उपजिलाधिकारी, ग्राम प्रधानों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे अभियान के दौरान केवल नामांकन तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों की नियमित उपस्थिति और शिक्षण की गुणवत्ता पर भी कड़ी निगरानी रखें। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि समुदाय का सहयोग मिलता रहा, तो जल्द ही जालौन शत-प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा।







