रिपोर्ट: नवीन त्रिपाठी अमेठी
अमेठी में आयोजित कार्यक्रम में ली भाजपा की सदस्यता, अभय सिंह ने भगवान श्रीराम और रामचरितमानस के मुद्दे पर सपा नेतृत्व को घेरा
अमेठी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार, 14 अक्टूबर को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। समाजवादी पार्टी के तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। अमेठी में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी की मौजूदगी में तीनों नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह और जालौन जिले की कालपी सीट से विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। तीनों नेता पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े थे। उनके भाजपा में शामिल होने से प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
भाजपा में शामिल होने के बाद अभय सिंह ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने भगवान श्रीराम, रामचरितमानस और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का विरोध करने वालों का वह विरोध करेंगे। उन्होंने रामचरितमानस को फाड़ने और जलाने की घटनाओं पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसी घटनाओं पर उचित प्रतिक्रिया नहीं दिया जाना उन्हें स्वीकार्य नहीं था। ये टिप्पणियां अभय सिंह ने अपने राजनीतिक फैसले के संदर्भ में कीं।
अभय सिंह ने भाजपा के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब भाजपा के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। उनके बयान के बाद सपा छोड़ने के कारणों और दोनों दलों की विचारधारा को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह वर्ष 2012, 2017 और 2022 में लगातार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 6,963 मतों से हराया था। गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह ने वर्ष 2012 और 2022 में जीत दर्ज की, जबकि कालपी से विनोद चतुर्वेदी वर्ष 2007 और 2022 में विधायक चुने गए थे।
तीनों नेताओं और समाजवादी पार्टी के बीच दूरी राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद बढ़ी थी। राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह के भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद सामने आए। बाद में दोनों को विधानसभा में असंबद्ध सदस्यों के रूप में सूचीबद्ध किए जाने की खबरें आई थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने इन नेताओं को जून 2025 में निष्कासित कर दिया था।
तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद अब राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम के संभावित प्रभावों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इसका संबंधित विधानसभा क्षेत्रों और दोनों दलों के संगठन पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।







