उरई में ‘झाड़ू’ से उखड़ रही सीसी सड़क: राजेंद्र नगर में निर्माण कार्य की खुली पोल, डीएम से जांच की मांग

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई (जालौन): उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई नगर पालिका क्षेत्र में ‘विकास’ की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से बयां करती है। नगर के राजेंद्र नगर स्थित वार्ड नंबर 12 में हाल ही में बनाई गई सीसी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर स्थानीय निवासियों ने न केवल गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि इसे सरकारी धन का खुला दुरुपयोग करार दिया है। हालात इतने बदतर हैं कि सड़क का मसाला झाड़ू लगाने भर से उखड़कर बाहर आ रहा है।
निर्माण मानकों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय निवासी पवन कुमार सिंह और अन्य नागरिकों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार ने मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। सड़क बनने के कुछ ही दिनों के भीतर यह पूरी तरह से जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। निवासियों का कहना है कि जिस निर्माण कार्य में सालों का भरोसा होना चाहिए था, वह चंद दिनों में ही अपनी पोल खोल रहा है। सफाई कर्मचारियों द्वारा सड़क की सफाई के लिए झाड़ू का उपयोग करते ही सीमेंट और गिट्टी का मसाला सड़क की सतह से अलग होकर बिखरने लगता है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सड़क की नींव में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
विभागीय उदासीनता से भड़का जन आक्रोश
शिकायतकर्ता पवन सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर पूर्व में भी संबंधित विभागीय अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए थे। हालांकि, जिम्मेदारों ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करना ही उचित समझा, जिससे ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका और अधिक पुख्ता हो गई है। जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो निवासियों ने सीधे जिलाधिकारी (डीएम) का रुख करने का निर्णय लिया।
डीएम से की गई सख्त कार्रवाई की मांग
मंगलवार को पवन सिंह के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। इस शिकायत में मांग की गई है कि:
- तकनीकी जांच: सड़क निर्माण में उपयोग की गई सामग्री और कार्य प्रक्रिया की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।
- भुगतान पर रोक: जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित ठेकेदार का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- दंडात्मक कार्रवाई: यदि जांच में अनियमितता या घटिया सामग्री का उपयोग सिद्ध होता है, तो संबंधित ठेकेदार और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सार्वजनिक धन की बर्बादी पर चिंता
स्थानीय नागरिकों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी खजाने का पैसा आम जनता का पैसा होता है। यदि इसी तरह विकास कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार होता रहा, तो क्षेत्र का विकास केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। निवासियों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो और आम लोगों को आवागमन में हो रही कठिनाइयों से निजात मिल सके। फिलहाल, इस मामले ने पूरे नगर पालिका क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है, और सबकी निगाहें अब डीएम द्वारा लिए जाने वाले फैसले पर टिकी हैं।







