कोंच: मानकों की धज्जियां उड़ाकर बनाई जा रही 11 लाख की सड़क, ग्रामीणों के आक्रोश के बाद विधायक ने दिए जांच के कड़े निर्देश

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
कोंच (जालौन): उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर बेहतर कनेक्टिविटी और गड्ढा मुक्त सड़कों का दावा कर रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर कार्यदायी संस्थाएं और ठेकेदार सरकारी मंशा को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला कोंच ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम गुरावती से सामने आया है, जहाँ लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाए जा रहे एक किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग में खुलेआम मानकों की अनदेखी का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने इस धांधली के खिलाफ लामबंद होकर क्षेत्रीय विधायक के द्वार पर दस्तक दी है।
11 लाख की लागत, पर गुणवत्ता शून्य: ग्रामीणों के गंभीर आरोप

शनिवार को ग्राम गुरावती के दर्जनों ग्रामीण, जिनमें सुधीर दुबे (एडवोकेट), अजय पटेल, पप्पू पटेल, प्रमोद और राजकुमार प्रमुख रूप से शामिल थे, क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र निरंजन के आवास पर पहुंचे। ग्रामीणों ने एक लिखित शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि उरई की एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा करीब 11 लाख रुपये की लागत से इस नई सड़क का निर्माण कराया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि:
- सड़क पर न तो सही ढंग से पिचिंग की गई है और न ही भारी रोलर चलाकर बेस को मजबूत किया गया है।
- डामर की मात्रा अत्यंत कम रखी जा रही है और मात्र एक इंच मोटी जीरा गिट्टी की परत बिछाकर खानापूर्ति की जा रही है।
- ग्रामीणों की आशंका है कि यह सड़क पहली बारिश भी नहीं झेल पाएगी और जल्द ही फिर से गड्ढों में तब्दील हो जाएगी, जिससे सरकारी धन की बर्बादी तय है।
विरोध करने पर ठेकेदार की मनमर्जी, शिकायत के बाद हड़कंप
ग्रामीणों ने विधायक को अवगत कराया कि जब उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों और ठेकेदार के प्रतिनिधियों से कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल किए और विरोध दर्ज कराया, तो उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। निर्माण से जुड़े लोग अपनी मनमर्जी से कार्य जारी रखे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो लाखों का बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा और गाँव की स्थिति जस की तस बनी रहेगी।
विधायक मूलचंद्र निरंजन का सख्त रुख: दोषियों पर होगी कार्रवाई
मामले की गंभीरता और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए विधायक मूलचंद्र निरंजन तत्काल हरकत में आए। उन्होंने मौके से ही विभागीय जूनियर इंजीनियर (JE) को फोन लगाकर कड़ी फटकार लगाई और निर्माण कार्य की तत्काल तकनीकी जांच करने के निर्देश दिए।
विधायक ने मीडिया और ग्रामीणों से मुखातिब होते हुए स्पष्ट किया कि:
”क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में सड़क की गुणवत्ता खराब पाई गई या मानकों में हेराफेरी मिली, तो संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेवार अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।”
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस प्रकरण ने एक बार फिर पीडब्ल्यूडी के पर्यवेक्षण (Supervision) पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण के लिए क्यों नहीं पहुंचे? फिलहाल, विधायक के हस्तक्षेप के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अब सबकी नजरें होने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि सड़क को उखाड़कर दोबारा मानकों के अनुरूप बनाया जाए ताकि जनता को एक टिकाऊ रास्ता मिल सके।







