पत्नी को बचाने की जंग हार गया सेना का जांबाज: सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उमरी नगर (जालौन) : कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्योछावर करने का जज्बा रखने वाला सेना का एक जवान अपनों को बचाने की जंग में जिंदगी की बाजी हार गया। जालौन जिले के रामपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ऊमरी नगर निवासी भारतीय थल सेना के जवान बृजेंद्र सिंह जोधावत, जो अपनी पत्नी को आग की लपटों से बचाते समय गंभीर रूप से झुलस गए थे, शुक्रवार को उपचार के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। शनिवार को जब शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा क्षेत्र ‘अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा।
हादसे ने छीना परिवार का सुख
घटनाक्रम के अनुसार, माधौगढ़ तहसील के ऊमरी नगर निवासी नवाब सिंह जोधावत के इकलौते पुत्र बृजेंद्र सिंह जोधावत (31) वर्ष 2013 में भारतीय थल सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह छुट्टी पर अपने घर आए हुए थे। दुर्भाग्यवश, 4 मार्च 2026 की रात करीब 8:30 बजे घर में खाना बनाते समय उनकी पत्नी संगम देवी के कपड़ों में गैस चूल्हे से अचानक आग लग गई। पत्नी की चीख पुकार सुनकर बृजेंद्र सिंह बिना एक क्षण गंवाए उन्हें बचाने के लिए लपटों के बीच कूद पड़े।
अस्पताल में संघर्ष और दुःखद अंत
अपनी जान की परवाह न करते हुए बृजेंद्र ने पत्नी को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन इस प्रक्रिया में वह स्वयं भी बुरी तरह झुलस गए। गंभीर स्थिति में दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान पहले उनकी पत्नी संगम देवी ने दम तोड़ दिया। पत्नी के निधन से परिवार अभी उबरा भी नहीं था कि लखनऊ के सैन्य अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे बृजेंद्र सिंह भी 13 मार्च को जिंदगी की जंग हार गए।
नम आंखों से दी गई अंतिम सलामी
शनिवार, 14 मार्च को सेना की टुकड़ी जब बृजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंची, तो कोहराम मच गया। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इस दौरान प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार वैभव गुप्ता, थाना प्रभारी रामपुरा इंस्पेक्टर रजत कुमार सिंह और पुलिस बल मौजूद रहा। सैन्य परंपराओं और पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में संपन्न हुआ।
पीछे छूट गई चार वर्षीय मासूम
बृजेंद्र सिंह अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और उनकी दो बहनें हैं। वर्ष 2014 में उनका विवाह इटावा निवासी संगम देवी के साथ हुआ था। इस दुखद हादसे ने न केवल एक वृद्ध माता-पिता से उनका सहारा छीना, बल्कि उनकी चार वर्षीय मासूम पुत्री के सिर से माता और पिता दोनों का साया हमेशा के लिए उठ गया है। गांव वालों के अनुसार, बृजेंद्र बचपन से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे और उनका यह बलिदान उनके अदम्य साहस और प्रेम का प्रतीक बनकर क्षेत्र की स्मृतियों में सदैव जीवित रहेगा।







