यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी पहल: कालपी में एसटीपी निर्माण हेतु भूमि का चयन संपन्न, जल्द शुरू होगा कार्य

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उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी में यमुना नदी के तट के पास प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थल का निरीक्षण करते राजस्व टीम और अधिकारी

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कालपी (जालौन) : उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक नगर कालपी के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वर्षों से लंबित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट की समस्या का अब स्थायी समाधान होने जा रहा है। जिलाधिकारी के विशेष दिशा-निर्देशों के बाद, कालपी नगर में अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। यह कदम न केवल नगर की स्वच्छता व्यवस्था को सुधारेगा, बल्कि पवित्र यमुना नदी के अस्तित्व को बचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

प्रशासनिक सक्रियता: भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी

​एसटीपी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने अपनी गति तेज कर दी है। उपजिलाधिकारी (SDM) कालपी, मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग और जल निगम की एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के पश्चात, रायढ़ दिवारा रोड स्थित मौजा तरीबुल्दा की गाटा संख्या 67/1 में से लगभग 5000 वर्ग मीटर भूमि को इस परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया और उसका चयन कर लिया गया है।

​अधिकारियों के अनुसार, कुल 2.953 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली इस भूमि को पहले भी स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत चिन्हित किया गया था, जिससे अब कानूनी और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने में आसानी होगी और परियोजना जल्द गति पकड़ेगी।

यमुना नदी के प्रदूषण पर लगेगा अंकुश

​वर्तमान में कालपी नगर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। नगर का सारा दूषित जल रायढ़ गांव के पास स्थित नालों के माध्यम से सीधे यमुना नदी में प्रवाहित हो रहा है। इससे भी अधिक गंभीर समस्या कालपी के प्रसिद्ध हाथ कागज (Handmade Paper) उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट है। बिना किसी शोधन के यह जहरीला पानी यमुना के जल को काला और दूषित बना रहा था, जिससे जलीय जीवन और पर्यावरण पर भारी संकट मंडरा रहा था।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कड़ा रुख

​पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने पहले ही सख्त रुख अपनाया हुआ था। बोर्ड द्वारा संबंधित हाथ कागज इकाइयों और नगर पालिका परिषद को बार-बार चेतावनी दी जा रही थी। मानकों की अनदेखी करने पर पूर्व में इन पर भारी आर्थिक दंड (Environment Compensation) भी लगाया गया था। एसटीपी के निर्माण से अब इन उद्योगों को भी एक व्यवस्थित मार्ग मिलेगा जिससे वे अपने अपशिष्ट का निस्तारण कर सकेंगे।

परियोजना का दूरगामी प्रभाव

​एसटीपी के क्रियान्वयन के बाद कालपी नगर की पूरी ड्रेनेज व्यवस्था बदल जाएगी।

  • जल शोधन: नगर का गंदा पानी पहले प्लांट में पहुंचेगा, जहाँ उसे आधुनिक मशीनों द्वारा शोधित किया जाएगा।
  • पर्यावरण संरक्षण: केवल शोधित और शुद्ध जल ही यमुना में गिरेगा, जिससे नदी की स्वच्छता बरकरार रहेगी।
  • कृषि और उद्योग: शोधित जल का उपयोग भविष्य में कृषि या अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए भी किया जा सकेगा।

अधिकारियों का वक्तव्य

​एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जल निगम के अवर अभियंता और राजस्व टीम के साथ किए गए संयुक्त निरीक्षण के बाद भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराया जाएगा ताकि कालपी वासियों को लंबे समय से व्याप्त गंदगी और प्रदूषण की समस्या से निजात मिल सके।

​यह परियोजना न केवल मुख्यमंत्री के ‘स्वच्छ उत्तर प्रदेश’ के विजन को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि कालपी जैसे ऐतिहासिक नगर के गौरव को भी पुनर्जीवित करने का कार्य करेगी। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है।

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