जालौन: स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखा रही अकोढ़ी दुबे की गंदगी; स्कूल के पास कचरे के अंबार से नौनिहालों का दम घोंट रही बदबू

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
जालौन:उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहाया जा रहा है। कागजों पर गांव ओडीएफ प्लस और साफ-सुथरे घोषित किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। जालौन जिले के विकास खंड अंतर्गत ग्राम अकोढ़ी दुबे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है। यहाँ प्राथमिक विद्यालय के ठीक बगल में स्थित कूड़ाघर बदहाली का केंद्र बन गया है, जिससे स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का जीना मुहाल है।
परीक्षा के समय बच्चों को झेलनी पड़ रही दोहरी मार
वर्तमान में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाओं का दौर चल रहा है। छात्र-छात्राएं पूरे उत्साह के साथ परीक्षा देने स्कूल पहुँच रहे हैं, लेकिन विद्यालय के प्रवेश मार्ग और आसपास फैली गंदगी उनके उत्साह को फीका कर रही है। विद्यालय के पीछे बने कूड़ाघर की स्थिति इतनी दयनीय है कि कचरा ओवरफ्लो होकर मुख्य सड़क तक आ गया है। परीक्षा देने आ रहे छोटे-छोटे बच्चों को इसी गंदगी और बजबजाती नालियों के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
कूड़ाघर बना ‘मुसीबत का घर’
शासन के निर्देशानुसार, गांव में गीले और सूखे कचरे के निस्तारण के लिए अलग-अलग व्यवस्था के साथ कूड़ाघर का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि वे कचरा तो कूड़ाघर में ही डालते हैं, लेकिन समय पर सफाई न होने और वहाँ से कूड़ा न उठाए जाने के कारण कचरा सड़कों पर फैल रहा है। आलम यह है कि कूड़ाघर अब कूड़ा संचयन के बजाय गंदगी फैलाने का स्रोत बन गया है। पास ही स्थित नालियां चोक पड़ी हैं, जिसका गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है।
दो-दो सफाई कर्मचारियों की तैनाती, फिर भी अव्यवस्था चरम पर
हैरानी की बात यह है कि ग्राम अकोढ़ी दुबे में दो-दो सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी या तो गांव आते नहीं हैं, और यदि आते भी हैं, तो मुख्य स्थानों की सफाई करने के बजाय खानापूर्ति करके चले जाते हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरकारी शिक्षण संस्थानों के पास यह स्थिति है, तो गांव के अन्य भीतरी हिस्सों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
समर कैंप और स्थानीय निवासियों पर संकट
स्कूल में चल रहे शैक्षणिक गतिविधियों और समर कैंप में आने वाले बच्चों के लिए यह बदबू असहनीय होती जा रही है। आसपास के बाशिंदों का कहना है कि कचरे से उठने वाली दुर्गंध के कारण घरों में बैठना भी मुश्किल हो गया है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का भय सता रहा है।
स्थानीय प्रशासन और विकास खंड अधिकारी (BDO) की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे या नौनिहाल इसी तरह गंदगी के साये में परीक्षा देने को मजबूर रहेंगे? ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और लापरवाह सफाई कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।







