जालौन: फसल बर्बादी का सदमा नहीं सह सका अन्नदाता, खेत से लौटते ही किसान की हृदयघात से मौत

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
एट (जालौन): उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में कुदरत की मार अब किसानों की जान पर भारी पड़ने लगी है। जनपद जालौन के एट कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिरौना में मंगलवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। यहाँ एक 38 वर्षीय युवा किसान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हुई फसल को देखकर किसान गहरे सदमे में था, जिसके चलते उसे दिल का दौरा पड़ा।
खेत से लौटते ही पसरा मातम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिरौना निवासी सुरेंद्र कुमार (38) पुत्र उमाशंकर मंगलवार की सुबह रोज की तरह अपने खेतों की स्थिति देखने गए थे। जब वह खेत से वापस घर लौटे, तो उनके चेहरे पर मायूसी और भारी तनाव साफ झलक रहा था। घर पहुँचते ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में परिजन उन्हें इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
15 बीघा फसल पर फिरा पानी, सदमे में था किसान
मृतक के भाई पुष्पेंद्र ने बताया कि परिवार के पास कुल 15 बीघा कृषि योग्य भूमि है। इस वर्ष फसल अच्छी थी और सुरेंद्र को उम्मीद थी कि मेहनत रंग लाएगी। लेकिन पिछले दिनों हुई भारी बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने सुनहरी दिख रही फसल को मिट्टी में मिला दिया। पुष्पेंद्र के अनुसार, सुरेंद्र पिछले कई दिनों से फसल की बर्बादी को लेकर अत्यधिक मानसिक तनाव में थे। वह बार-बार इसी बात का जिक्र कर रहे थे कि अब परिवार का भरण-पोषण और आगामी खर्चों की व्यवस्था कैसे होगी। आशंका जताई जा रही है कि इसी आर्थिक तंगी और भविष्य की चिंता ने उन्हें मौत के आगोश में धकेल दिया।
परिवार का इकलौता सहारा था सुरेंद्र
सुरेंद्र कुमार अपने परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनके आकस्मिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक के पीछे उनके वृद्ध पिता उमाशंकर, मां सोना देवी, पत्नी सुनीता और दो मासूम बच्चे—बेटा राज व बेटी राधिका हैं। घर के मुखिया की मौत के बाद बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है और वृद्ध माता-पिता का बुढ़ापे का सहारा छिन गया है। पूरे गांव में इस घटना के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति आक्रोश के साथ-साथ मृतक परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति है।
प्रशासनिक मदद की दरकार
बुंदेलखंड में हर साल प्राकृतिक आपदाएं किसानों की कमर तोड़ देती हैं। पिरौना की यह घटना एक बार फिर खेती-किसानी के संकटपूर्ण हालातों को बयां करती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि मृतक किसान के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि अनाथ हुए बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। फिलहाल, पुलिस को सूचना दे दी गई है और मामले की जांच जारी है।







