सनसनीखेज: जालौन का यह सरकारी दफ्तर बना ‘जंग का अखाड़ा’! जायज सवाल पूछने पर युवक को लात-घूसों से अधमरा किया, वीडियो वायरल

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कालपी (जालौन) तहसील के उपनिबंधक कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) के भीतर का दृश्य, जहां सरकारी फाइलों और कुर्सियों के बीच कुछ दबंग बैनामा लेखक (वकील/लिपिक) एक आम युवक को घेरकर लात-घूसों से बेरहमी से पीट रहे हैं, आस-पास खड़े लोग मूकदर्शक बने हैं और कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल है।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

कालपी (जालौन) : उत्तर प्रदेश के सुशासन और कानून-व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ाने वाली एक बेहद शर्मनाक और विचलित करने वाली तस्वीर जालौन जिले से सामने आई है। कालपी तहसील का उपनिबंधक कार्यालय (रजिस्ट्री दफ्तर), जहां आम जनता अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदी गई संपत्तियों का कानूनी दस्तावेज तैयार कराने आती है, वह अचानक एक खूनी अखाड़े में तब्दील हो गया। एक आम नागरिक, जो केवल अपने लोकतांत्रिक और विधिक अधिकारों के तहत अपनी फाइल के देर होने का कारण पूछ रहा था, उसे सरकारी संरक्षण में पल रहे बाबुओं और दबंग बैनामा लेखकों ने सामूहिक हिंसा का शिकार बना डाला। इस दुस्साहसिक वारदात ने न केवल सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि इन दफ्तरों के भीतर एक समानांतर ‘गुंडा तंत्र’ सक्रिय है।

​लाइन में पहले होने पर भी पीछे धकेली फाइल: जब भ्रष्टाचार के खिलाफ उठा सवाल

​सूत्रों और चश्मदीदों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, कालपी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उपनिबंधक कार्यालय में एक युवक नियमानुसार अपने बैनामे (रजिस्ट्री) की प्रक्रिया पूरी कराने पहुंचा था। युवक की फाइल कतार में अन्य लोगों से पहले लगी हुई थी। घंटों इंतजार करने के बाद जब उसने देखा कि उसकी वैध और पहले से जमा फाइल को दरकिनार कर, बाद में आए रसूखदार और कथित रूप से ‘विशेष सेवा’ देने वाले लोगों की फाइलों को धड़ाधड़ आगे बढ़ाया जा रहा है, तो उसके सब्र का बांध टूट गया। युवक ने सीधे पटल पर बैठे बाबुओं और वहां मौजूद बैनामा लेखकों से बेहद तार्किक सवाल किया कि आखिर उसकी फाइल को जानबूझकर पीछे क्यों धकेला जा रहा है?

​’लात-घूंसे और गालियां’: दफ्तर के रक्षकों ने कैसे अख्तियार किया भक्षकों का चोला

​आम तौर पर सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है, लेकिन कालपी के इस दफ्तर में सवाल पूछना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया। युवक का इतना पूछना था कि वहां मौजूद भ्रष्ट गठजोड़ तिलमिला उठा। अपनी साख और दफ्तर के भीतर चलने वाले कथित ‘अंडर-टेबल’ खेल के उजागर होने के डर से बौखलाए बैनामा लेखकों और कुछ बाबुओं ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। देखते ही देखते पूरा दफ्तर चीख-पुकार से गूंज उठा। दबंगों ने युवक को कॉलर से पकड़ा और उस पर लात-घूसों की बौछार कर दी। पीड़ित युवक अपनी जान बचाने के लिए दफ्तर के कोनों में छिपने का प्रयास करता रहा, लेकिन सरकारी कुर्सियों के पीछे घेर-घेरकर उसे बेरहमी से पीटा गया। सरकारी फाइलों के अंबार के बीच इस तरह की नग्न गुंडागर्दी कैमरे में कैद हो गई।

​सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: कानून के रखवालों की चुप्पी पर बड़े सवाल

​इस पूरी वारदात का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सुरक्षा के दावों के बीच एक आम आदमी को सरेआम कीड़े-मकौड़ों की तरह रौंदा जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस वक्त यह मारपीट हो रही थी, दफ्तर के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे थे। कालपी तहसील परिसर में इस तरह की अराजकता कानून व्यवस्था पर एक गहरा तमाचा है। क्या अब उत्तर प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में आम आदमी अपनी शिकायत या सवाल लेकर जाने से भी डरेगा?

​खोजी पत्रकारिता का बड़ा सवाल: क्या थमेगा रजिस्ट्री दफ्तरों का यह काला खेल?

​यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी उपनिबंधक कार्यालय से इस तरह के विवाद की खबर आई हो। असल में, यह मारपीट केवल एक तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि उस गहरी जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार का नतीजा है जो इन दफ्तरों में ‘दलाली तंत्र’ के जरिए फलता-फूलता है। जब कोई आम नागरिक बिना किसी बिचौलिए के सीधे काम कराना चाहता है, तो उसे इसी तरह प्रताड़ित किया जाता है। फिलहाल, कालपी कोतवाली पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है और मामले की जांच की बात कह रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या दोषी बाबुओं और दबंग बैनामा लेखकों पर ऐसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी जो मिसाल बन सके, या फिर कागजी खानापूर्ति कर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जनता अब जवाब मांग रही है।

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