जालौन में भाजपा की जिला उपाध्यक्ष पर लगा सगे भाई के गैरिज पर अवैध कब्जे का आरोप, न्याय के लिए दर-दर भटक रही पीड़िता

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जालौन के उरई स्थित गांधीनगर में विवादित गैरिज के बाहर खड़ी पीड़िता सरोज वर्मा और उनके परिजन, प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करते हुए।

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD

जालौन : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई कोतवाली अंतर्गत गांधीनगर इलाके से सत्ता के रसूख और पारिवारिक अंतर्कलह का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला ने अपनी ही जेठानी, जो खुद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला उपाध्यक्ष बताती हैं, पर अपने स्वामित्व वाले गैरिज पर अवैध रूप से कब्जा करने और खाली न करने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़िता का आरोप है कि सत्ता पक्ष से जुड़े होने के कारण स्थानीय पुलिस भी इस मामले में मूकदर्शक बनी हुई है और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। थक-हारकर पीड़िता ने जिलाधिकारी के समक्ष गुहार लगाई है।

भरोसे का फायदा उठाकर कब्जे का आरोप: क्या है पूरा मामला?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांधीनगर निवासी सरोज वर्मा ने जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को एक शिकायती पत्र सौंपकर अपनी आपबीती सुनाई है। पीड़िता सरोज वर्मा के मुताबिक, विवादित गैरिज सरकारी दस्तावेजों में 13 सितंबर 2023 से विधिवत रूप से उनके नाम पर पंजीकृत (स्वामित्व में) दर्ज है।

​पीड़िता ने बताया कि कुछ समय पहले उनकी जेठानी रेखा वर्मा और उनके पुत्र हर्षवर्धन वर्मा ने पारिवारिक संबंधों और आपसी भरोसे की दुहाई देकर उनसे कुछ समय के लिए गैरिज का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी। उस समय रेखा वर्मा के परिवार द्वारा तर्क दिया गया था कि उनकी बेटी की शादी है और घर में वाहनों को खड़ा करने की गंभीर समस्या है, जिसके कारण उन्हें अस्थायी तौर पर जगह की आवश्यकता है। सरोज वर्मा ने पारिवारिक सौहार्द को देखते हुए उन्हें गैरिज इस्तेमाल करने दे दिया, लेकिन यही उदारता अब उनके लिए मुसीबत का सबब बन चुकी है।

सत्ता और रसूख की धौंस: “मैं भाजपा की जिला उपाध्यक्ष हूँ…”

​शिकायती पत्र में किए गए दावों के अनुसार, जब शादी का कार्यक्रम संपन्न हो गया और काफी समय बीत जाने के बाद भी गैरिज खाली नहीं किया गया, तो सरोज वर्मा और उनके बेटों ने अपनी संपत्ति वापस मांगी। आरोप है कि संपत्ति वापस मांगने पर रेखा वर्मा और उनके पुत्र हर्षवर्धन वर्मा ने साफ तौर पर गैरिज खाली करने से इनकार कर दिया।

​पीड़िता का आरोप है कि जब भी वे इस विषय पर बात करने का प्रयास करती हैं, तो रेखा वर्मा स्वयं को भाजपा की जिला उपाध्यक्ष बताते हुए अपने प्रशासनिक व राजनैतिक प्रभाव का हवाला देती हैं और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां देती हैं। वहीं, उनके पुत्र हर्षवर्धन वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता और उनके परिवार के साथ अभद्र भाषा और गाली-गलौज का प्रयोग किया तथा सीधे शब्दों में कह दिया कि जो करना हो कर लो, गैरिज खाली नहीं होगा। साथ ही मामले को जानबूझकर लंबा खींचने के लिए कोर्ट में ले जाने की धमकी भी दी गई है।

घर में शादी का माहौल, पर गैरिज पर कब्जे से परिजन परेशान

​पीड़िता सरोज वर्मा ने अपनी शिकायत में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया है कि वर्तमान में उनके छोटे बेटे की शादी बेहद निकट है। घर में मांगलिक कार्यक्रम होने के कारण बड़ी संख्या में मेहमानों का आगमन होने वाला है, जिसके लिए वाहनों की पार्किंग और अन्य व्यवस्थाओं की सख्त जरूरत है। अपने ही गैरिज पर कब्जा होने के कारण पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है और आगामी वैवाहिक कार्यक्रम की व्यवस्थाएं पूरी तरह से प्रभावित हो रही हैं।

​इस पूरे घटनाक्रम पर पीड़ित पक्ष के अभिषेक वर्मा, रामप्रकाश वर्मा और स्वयं पीड़िता सरोज वर्मा ने अपने बयानों (बाइट) के जरिए अपनी पीड़ा व्यक्त की है और प्रशासन से त्वरित न्याय की मांग की है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, प्रशासन का रुख अभी स्पष्ट नहीं

​इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आया है। पीड़िता का स्पष्ट आरोप है कि उन्होंने उरई कोतवाली पुलिस से इस संबंध में शिकायत की थी, लेकिन सत्ताधारी दल की नेता का मामला होने के कारण पुलिस ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया और लगातार मामले को टालती रही।

​फिलहाल, मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले में जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। अब देखना यह होगा कि क्या योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ और अवैध कब्जों के खिलाफ कड़े रुख के तहत एक आम महिला को उसकी संपत्ति वापस मिल पाती है या राजनैतिक रसूख के आगे कानून बौना साबित होगा।

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