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Jalaun Uttar Pradesh

जालौन में बारिश के बीच तिरपाल के साये में अंतिम विदाई, श्मशान घाटों की बदहाली पर फूटा गुस्सा

जालौन में बारिश के बीच तिरपाल के साये में अंतिम विदाई और बदहाल श्मशान घाट का दृश्य

बुंदेलखंड के जालौन जिले में श्मशान घाटों की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्थायी समाधान की मांग की है।

जालौन : बुंदेलखंड के जालौन जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के श्मशान घाटों की बदहाली को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बारिश के मौसम में पक्के श्मशान घाट, टीन शेड और संपर्क मार्गों की सुविधा न होने के कारण लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर बारिश के बीच तिरपाल लगाकर चिता सजाने और जलभराव व कीचड़ के बीच से शवयात्रा निकालने की स्थिति सामने आई है।


​इसी गंभीर समस्या को लेकर बुंदेलखंड दलित अधिकार संघ के बैनर तले ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी जालौन राजेश कुमार पांडेय को ज्ञापन सौंपा और मामले के स्थायी समाधान की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि हरकौली समेत भदरेखी, भरिजपुर, सुरावली, गोराकरनपुर, गढ़गुवा, तीतराखलीलपुर और खैरवार व्योना आदि गांवों में श्मशान घाटों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।


​हाल ही में हरकौली में देवेंद्र दोहरे के निधन के बाद परिजनों को बारिश के दौरान अंतिम संस्कार के लिए तिरपाल और प्लास्टिक की व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस मामले पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुलदीप कुमार चौधरी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन के साथ-साथ सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है।


​ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के टीन शेड, ऊंचे चबूतरे, पेयजल, सीसी मार्ग, भूमि आवंटन और अंतरिम रूप से वाटरप्रूफ तिरपाल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही इस व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी पुरजोर मांग उठाई गई है।

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