भारत की जनगणना-2027 का शंखनाद: जालौन में डिजिटल गणना हेतु अधिकारियों का सघन प्रशिक्षण शुरू

रिपोर्ट : राहुल, जालौन।UP SAMVAD
उरई, जालौन: भारत की आगामी 16वीं जनगणना को ऐतिहासिक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक और प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ‘भारत की जनगणना-2027’ के प्रथम चरण, यानी “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” को सुव्यवस्थित और त्रुटिहीन तरीके से संपन्न कराना है।
डिजिटल क्रांति: पहली बार मोबाइल ऐप से होगा डेटा संकलन
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस बार की जनगणना पारंपरिक कागजी पद्धति को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब जनगणना के लिए ‘स्व-गणना (Self-Enumeration)’ की सुविधा नागरिकों को दी जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और प्रगणकों को डिजिटल ऐप और सीएमएमएस (CMMS) पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन करने का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्रणाली से डेटा की शुद्धता बढ़ेगी और गणना की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
दो चरणों में संपन्न होगी महागणना: महत्वपूर्ण तिथियां
प्रशिक्षण के दौरान जनगणना के विस्तृत रोडमैप पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि जनगणना की प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में विभाजित है:
- प्रथम चरण (1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026): इस अवधि में मकान सूचीकरण एवं आवास गणना का कार्य किया जाएगा। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और आधारभूत व्यवस्थाओं से जुड़े 33 महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करेंगे।
- द्वितीय चरण (9 से 28 फरवरी 2027): इस मुख्य चरण में जनसंख्या एवं जाति गणना (Population/Caste Enumeration) का कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात 1 से 5 मार्च 2027 तक ‘रिवीजन राउंड’ आयोजित होगा ताकि कोई भी व्यक्ति गणना से छूट न पाए।
पारदर्शिता और सटीकता पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना केवल एक सांख्यिकीय कार्य नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के भविष्य की योजनाओं, नीतियों और विकास के ढांचे को तैयार करने का आधार है। उन्होंने तहसीलदारों, अधिशासी अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ को निर्देशित किया कि डेटा संकलन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से पूर्ण पारदर्शिता, शुद्धता और समयबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की अपील की।
प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों की उपस्थिति
इस अवसर पर लखनऊ से आई विशेष ट्रेनर रश्मि सिंह ने उपस्थित अधिकारियों को डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ऐप के माध्यम से डेटा को रियल-टाइम सिंक किया जाएगा। बैठक में जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार सहित जनपद के सभी तहसीलदार, नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
प्रशासन द्वारा आयोजित यह दो और तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशालाएं जनपद के प्रत्येक ब्लॉक और तहसील स्तर तक पहुंचाई जाएंगी, ताकि जनगणना की इस विशाल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा जा सके।







